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Hamari Aavaaz हमारी आवाज़

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Categories
Country
India
This podcast has
189 episodes
Language
Hindi
Explicit
Yes
Date created
2020/06/09
Latest episode
2026/01/25
Average duration
9 min.
Release period
58 days

Description

Listening Platform with Shashi Bhooshan: Hamari Aavaaz शशिभूषण के साथ सुनने का साझा मंच: हमारी आवाज़

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Swami Vivekanand ki kavita Jagrat Devta
2026/01/25
स्वामी विवेकानंद की कविता, 'जाग्रत देवता'। कविता 'जाग्रत देवता' वेदांत दर्शन, "यत्र जीव तत्र शिवरूप" की प्रतिध्वनि ही है। वाचन : शशिभूषण
Vasant Panchmi
2026/01/23
23 जनवरी 2026 ऐसा सुयोग कभी कभी घटता है। आज 23 जनवरी है। वसंत पंचमी। निराला जयंती और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पराक्रम दिवस। आज के दिन सुनिए महाप्राण निराला की तीन कविताएँ । शशिभूषण
Swami Vivekanand's Speech
2026/01/11
स्वामी विवेकानंद का भाषण विश्व धर्म संसद शिकागो वाचन : शशिभूषण युवा दिवस : 12 जनवरी 2024
Apni Chhatraon ke liye
2026/01/11
बढ़ते रहना ( अपनी छात्राओं के लिए ) तुम जब पहली बार सामने पड़ी प्यारी बच्ची थी चाहे शांत चाहे शरारती चाहे चुप चाहे बातूनी चाहे लापरवाह चाहे उत्साही चाहे सीधी चाहे निर्भीक चाहे जीती चाहे हारी चाहे पास चाहे फ़ेल दौड़कर आयी चाहे उदास लौटी प्रशंसा पायी चाहे डाँट खायी तुम हँसी रोयी खेली नाची झगड़ी मिलकर रही सम्मान किया शिकायत की तुमने सुना नहीं सुना माना नहीं माना किया नहीं किया चिढ़ी परेशान किया गर्व दिया बीमार पड़ी मेरा भी काम किया तुम बड़ी हुई मैं तुम्हारी शादी में आया तुम्हें पढ़ा सुना देखा तुम्हारी नौकरी लगी तुमने ज़मीन ली घरवालों का इलाज कराया भाई बहनों को सँवारा तुमने मेहनत की जूझी तुम्हारा नाम हुआ तुमने समाचार दिया गुरु पूर्णिमा शिक्षक दिवस की बधाई दी तुम कहीं मिली मैंने पहचान लिया तुमने पूछा- सर पहचाना? मैं बहुत पछताया तुम्हारे दोस्त माँ बाप रिश्तेदार सहकर्मी मिले तुम्हारी बातें हुईं तुम भूल गयीं तुम्हारी याद आ गयी तुम्हारी कितनी स्मृतियाँ हैं तुम बच्ची थी तब से लेकर तुम बड़ी हुई जैसे मेरे भीतर बड़ी हुई बढ़ते रहना हमेशा खुश रहना • शशिभूषण 10.01.2026
Lekhak ka sbaha nikala
2026/01/10
छाती पर लिखी गई समकालीन कहानी गुरुघासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर में वाचाल कुलपति द्वारा प्रमुख हिंदी कहानीकारों में से एक मनोज रूपड़ा को मिले अपमानजनक सभा निकाला घटनाक्रम पर प्रस्तुत है संगीत साधक और साहित्यकार डॉ रामकुमार सिंह की फ़ेसबुक कविता पोस्ट। हिंदी शिक्षक रहे डॉ रामकुमार सिंह इन दिनों अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के केंद्रीय विद्यालय में प्राचार्य हैं। सभा से निकाले जाने के बाद लेखक बाहर नहीं गया— वह बस कहानी में चला गया। उसने देखा, कुलपति मंच नहीं थे, वो एक विशाल छाती बन चुके थे— फूली हुई, भाषणों से तनी हुई, और आत्मसम्मान के बटन से बंद। तभी एक लेखक चढ़ा, फिर दूसरा, फिर तीसरा— कोई जूते उतारकर, कोई पेन निकालकर। “अरे! यह क्या कर रहे हो?” छाती ने गुर्राकर पूछा। लेखकों ने कहा— “घबराइए नहीं महोदय, यह समकालीन कहानी है— इसे पढ़ा नहीं जाता, लिखा जाता है… वह भी वहीं, जहाँ सबसे ज़्यादा दबाव होता है।” एक ने पसलियों के बीच नायक रख दिया— जो सुनना चाहता है। दूसरे ने दिल के पास एक संवाद चिपकाया— “बोरियत सत्ता की बीमारी है।” तीसरे ने फेफड़ों पर हाशिए के लोग बसा दिए— ताकि हर साँस में लोकतंत्र घुले। छाती हाँफने लगी। उस पर कहानी फैलती गई— बिना अनुमति, बिना अध्यक्षीय स्वीकृति। कुलपति बोले— “यह अनुशासनहीनता है!” लेखक हँसे— “जी हाँ, इसी अनुशासनहीनता से साहित्य पैदा होता है।” सभा तालियों से नहीं, खामोशी से भर गई— क्योंकि पहली बार कहानी मंच पर नहीं, छाती पर लिखी जा रही थी। और जब सब उतर गए, छाती पर पंक्ति रह गईं— “जो लेखक को बाहर करता है, वह अंततः कहानी के भीतर चला जाता है। कहानीकार सभा निकाला के बाद लेखक बिरादरी में सच्चा सम्मान पाता है।" ०००
Savitri Bai Ke Kavyansh
2026/01/03
सावित्री बाई के काव्यांश भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्री बाई का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा में माली समाज में हुआ। उनका विवाह ज्योतिबा फुले से हुआ। महात्मा फुले ने उनकी शिक्षा का दायित्व संभाला। सामाजिक विरोध का सामना करते सावित्री बाई ने सन 1848 में पुणे में लड़कियों के लिये पहला स्कूल स्थापित किया। सावित्री-ज्योतिबा दंपति ने कुल 18 स्कूल शुरू किये और चलाए। दलित समुदाय के उत्थान के लिये नेटिव मेल स्कूल, पुणे और सोसाइटी फॉर प्रमोटिंग द एजुकेशन ऑफ महार, मंग्स (Mangs) जैसे शैक्षिक ट्रस्टों की शुरुआत की। सन 1863 में, ज्योतिराव और सावित्री बाई ने बालहत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की, जो कन्या भ्रूण हत्या रोकने और गर्भवती ब्राह्मण विधवाओं और बलात्कार पीड़ितों की सहायता के लिये भारत का पहला गृह था। अस्पृश्यता समाप्त करने के लिए  सन 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना सावित्री बाई और ज्योतिराव फुले का एक महान समाज सुधार प्रदेय है। सावित्री बाई ने काव्य फुले (1854) और बावन काशी सुबोध रत्नाकर (1892) नामक दो प्रसिद्ध कृतियाँ लिखीं। 'गो, गेट एजुकेशन' सावित्री बाई की प्रसिद्ध कविता है। सावित्री बाई की जयंती के अवसर पर प्रस्तुत हैं मज़दूर बिगुल, समालोचन, स्त्रीकाल, फॉर्वर्ड प्रेस, द वायर, अनिता भारती, गूगल के सौजन्य से उनके कुछ काव्यांश:- सावित्री बाई के काव्यांश --------------------- ज्ञान नहीं, विद्या नहीं पढ़-लिखकर शिक्षित होने की मंशा नहीं बुद्धि होकर भी उसे व्यर्थ गँवाए उसे कैसे कहें इंसान? *** ज्ञान के बिना सब खो जाता है ज्ञान के बिना हम जानवर बन जाते हैं इसलिए ख़ाली न बैठो और जा कर शिक्षा लो तुम्हारे पास सीखने का सुनहरा मौक़ा है इसलिए सीखो और जाति के बन्धन तोड़ो। *** हमारे जानी दुश्मन का नाम है अज्ञान उसे धर दबोचो मज़बूत पकड़ कर पीटो और उसे जीवन से भगा दो। *** संसार में स्वाभिमान से जीने के लिए शिक्षा प्राप्त करो मनुष्यों का सच्चा गहना है शिक्षा विद्यालय जाओ पहला काम है पढ़ाई, दूसरा काम खेल-कूद पढ़ाई से फुर्सत मिले तभी करो घर की साफ़-सफाई चलो, अब पाठशाला जाओ। *** जो वाणी से उच्चार करे वैसा ही बर्ताव करे वे ही नर नारी पूजनीय सेवा परमार्थ पालन करे व्रत यथार्थ और होवे कृतार्थ वे सब वंदनीय। सुख हो दुख कुछ स्वार्थ नही जो जतन से करे अन्यो का हित वे ही ऊँचे, मानवता का रिश्ता जो जानते हैं वे सब सावित्री कहे सच्चे संत। *** मेरी जन्मभूमि मुझे वंदनीय और दिल से प्यारी मैं उसका गौरव गीत गाती हूँ। चयन : शशिभूषण
Visarjan
2025/12/27
उपन्यास : आनंद मठ लेखक : बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय चौथा खंड, अंतिम अध्याय
Shikshikaen | Shashi Bhooshan
2024/03/08
"शिक्षिकाएँ" कविता एवं वाचन : शशिभूषण
Katyayani ki kavita | Vasiyatnama
2024/03/08
वसीयतनामा लिखने जैसी कुछ गुफ़्तगू कवि : कात्यायनी वाचन : शशिभूषण (बया, अप्रैल-मार्च 2024)
Sarveshwardayal Saxena | Dhire Dhire
2024/02/15
धीरे-धीरे कवि : सर्वेश्वरदयाल सक्सेना वाचन : शशिभूषण
Rahen yaa n rahen
2024/01/02
"रहें या न रहें". कविता एवं वाचन: शशिभूषण.
Bhasha Singh | Chunav Jang aur Medea
2023/12/27
"चुनाव जंग और मीडिया" वक्ता : भाषा सिंह, जन पक्षधर जुझारू पत्रकार। आयोजक : राष्ट्रीय सांस्कृतिक यात्रा, ढाई आखर प्रेम 2023, इंदौर (म.प्र.)। स्थल : मध्य प्रदेश प्रेस क्लब, अभिनव कला समाज सभागार इंदौर। तिथि : 27 दिसंबर 2023, शाम 05.55 बजे।
Dhai Aakhar Prem | Subah ke intzar men
2023/12/26
सुबह के इंतज़ार में। विनीत तिवारी से बातचीत। प्रसंग: ढाई आखर प्रेम यात्रा। 26 दिसंबर 2023, सहस्त्र धारा नर्मदा, महेश्वर।
Chandrakant Devtale | Thode se bachche aur baqi bachche
2023/11/15
थोड़े से बच्चे और बाक़ी बच्चे कवि : चंद्रकांत देवताले वाचन : शशिभूषण
Kumar Ambuj | Kroorta
2023/11/15
क्रूरता कवि : कुमार अम्बुज वाचन : शशिभूषण

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