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Show Time With Rj Prasun

Advertise on podcast: Show Time With Rj Prasun

Categories
Country
India
This podcast has
19 episodes
Language
Hindi
Publisher
RJ PRASUN
Explicit
No
Date created
2020/06/28
Latest episode
2021/09/08
Average duration
2 min.
Release period
2 days

Description

कुछ शब्द जिन्हें आपके मन और दिल तक पहुंचाने की कोशिश है। मेरी लिखीं कविताएं हैं जिनमें आप अपने जज़्बात खोज लें।

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कबीर दास जी के दोहे 18
2021/09/08
कबीर कहा गरबियो, काल गहे कर केस. ना जाने कहाँ मारिसी, कै घर कै परदेस. अर्थ : कबीर कहते हैं कि हे मानव ! तू क्या गर्व करता है? काल अपने हाथों में तेरे केश पकड़े हुए है. मालूम नहीं, वह घर या परदेश में, कहाँ पर तुझे मार डाले. --- Send in a voice message: https://anchor.fm/rjprasun/message
कबीर दास जी के दोहे 17
2021/09/06
जब गुण को गाहक मिले, तब गुण लाख बिकाई. जब गुण को गाहक नहीं, तब कौड़ी बदले जाई. अर्थ : कबीर कहते हैं कि जब गुण को परखने वाला गाहक मिल जाता है तो गुण की कीमत होती है. पर जब ऐसा गाहक नहीं मिलता, तब गुण कौड़ी के भाव चला जाता है. --- Send in a voice message: https://anchor.fm/rjprasun/message
कबीर दास जी के दोहे 16
2021/09/05
कबीर लहरि समंद की, मोती बिखरे आई. बगुला भेद न जानई, हंसा चुनी-चुनी खाई. अर्थ :कबीर कहते हैं कि समुद्र की लहर में मोती आकर बिखर गए. बगुला उनका भेद नहीं जानता, परन्तु हंस उन्हें चुन-चुन कर खा रहा है. इसका अर्थ यह है कि किसी भी वस्तु का महत्व जानकार ही जानता है। --- Send in a voice message: https://anchor.fm/rjprasun/message
कबीर दास जी के दोहे 15
2021/09/03
कहत सुनत सब दिन गए, उरझि न सुरझ्या मन. कही कबीर चेत्या नहीं, अजहूँ सो पहला दिन. अर्थ : कहते सुनते सब दिन निकल गए, पर यह मन उलझ कर न सुलझ पाया. कबीर कहते हैं कि अब भी यह मन होश में नहीं आता. आज भी इसकी अवस्था पहले दिन के समान ही है. --- Send in a voice message: https://anchor.fm/rjprasun/message
कबीर दास जी के दोहे 14
2021/09/02
कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर, ना काहू से दोस्ती,न काहू से बैर। अर्थ : इस संसार में आकर कबीर अपने जीवन में बस यही चाहते हैं कि सबका भला हो और संसार में यदि किसी से दोस्ती नहीं तो दुश्मनी भी न हो ! --- Send in a voice message: https://anchor.fm/rjprasun/message
कबीर दास जी के दोहे 13
2021/09/01
दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार, तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार। अर्थ : इस संसार में मनुष्य का जन्म मुश्किल से मिलता है. यह मानव शरीर उसी तरह बार-बार नहीं मिलता जैसे वृक्ष से पत्ता झड़ जाए तो दोबारा डाल पर नहीं लगता. --- Send in a voice message: https://anchor.fm/rjprasun/message
कबीर दास जी के दोहे 12
2021/08/31
निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय। अर्थ : जो हमारी निंदा करता है, उसे अपने अधिकाधिक पास ही रखना चाहिए। वह तो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बता कर हमारे स्वभाव को साफ़ करता है. --- Send in a voice message: https://anchor.fm/rjprasun/message
कबीर दास जी के दोहे 11
2021/08/26
अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप, अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप। अर्थ: न तो अधिक बोलना अच्छा है, न ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है। जैसे बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं और बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं है। --- Send in a voice message: https://anchor.fm/rjprasun/message
कबीर दास जी के दोहे 10
2021/08/25
बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि, हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि भावार्थ: जो व्यक्ति अच्छी वाणी बोलता है वही जानता है कि वाणी अनमोल रत्न है। इसके लिए हृदय रूपी तराजू में शब्दों को तोलकर ही मुख से बाहर आने दें। boli ek anamol hai, jo koi bolai jaani, hiye taraajoo tauli ke, tab mukh baahar aani bhaavaarth: jo vyakti achchhi vaani bolata hai vahi jaanata hai ki vaani anamol ratn hai. isake lie hri day roopi taraajoo mein shabdom ko tolakar hi mukh se baahar aane dem. --- Send in a voice message: https://anchor.fm/rjprasun/message
कबीर दास जी के दोहे 09
2021/08/24
जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ, मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ। अर्थ : जो प्रयत्न करते हैं, वे कुछ न कुछ वैसे ही पा ही लेते हैं जैसे कोई मेहनत करने वाला गोताखोर गहरे पानी में जाता है और कुछ ले कर आता है. लेकिन कुछ बेचारे लोग ऐसे भी होते हैं जो डूबने के भय से किनारे पर ही बैठे रह जाते हैं और कुछ नहीं पाते. --- Send in a voice message: https://anchor.fm/rjprasun/message
कबीर दास जी के दोहे 08
2021/08/23
दोहा:- दोस पराए देखि करि, चला हसन्‍त हसन्‍त, अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत!! अर्थ:- यह मनुष्‍य का स्‍वभाव है कि जब वह दूसरों के दोष देखकर हंसता है, तब उसे अपने दोष याद नहीं आते जिनका न आदि है न अंत! --- Send in a voice message: https://anchor.fm/rjprasun/message
कबीर दास जी के दोहे 07
2021/08/22
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय । जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय ।। भावार्थ:कबीर दास जी कहते हैं, जब मैंने इस संसार में बुरे लोगो को खोजा, तो मुझे कोई भी बुरा आदमी नहीं मिला| परन्तु जब अपने अंदर झाँका (अपनी अंतरात्मा में खोजा) तो मुझसे बुरा नहीं कोई इस संसार में। --- Send in a voice message: https://anchor.fm/rjprasun/message

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