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Ved Life Mantra H-J-O

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This podcast has
123 episodes
Language
Hindi
Explicit
No
Date created
2021/01/08
Latest episode
2024/02/21
Average duration
11 min.
Release period
6 days

Description

My podcast is for all Humans & Humanity globally . I am the product of FIVE ELEMENTS with LOVE of My Dedicated , Devoted Parents & Gurus Respected Govind Singh ji, Res. Swami Vivekananda & Res. Dr. A.P.J. Abdul Kalam - Vande Maanavta 🇮🇳

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हंसते हंसते सत्य उजागर हो गया
2024/02/21
हंसते हंसते सत्य उजागर हो गया प्रकृति से आगे, समय के साथ होड़ में है ,समय के साथ होड़ लगाइए और समय से दौड़ते हुए आगे निकल जाना चाहता यह वर्तमान मानव, ठीक है कि आज के समय में औसत आयु पहले के हिसाब से अधिक है लेकिन रोग कितने अधिक हैं इसका कभी अंदाजा लगाया, हम नित्य प्रार्थना करते हैं कभी अनमने मन से और कभी सच्चे मन से कितनी प्रार्थनायें स्वीकार होती हैं ,हमारा आधार कितना सशक्त हो रहा है हमें नहीं मालूम हमें तो हर दो-तीन महीने में आने वाले नए-नए मोबाइल की भूख रहती है नए चैनल और हर कोई सिर्फ अमीर नहीं होना चाहता बल्कि बहुत अमीर होना चाहता है इसमें वह अपने जीवन की सच्चाई का आधार खोता जा रहा है, मैं यह नहीं कहूंगा कि मानव को न जाने क्या होता जा रहा है क्योंकि मानव को तो हो चुका है. इस युग के अंत के लिए इंसानों के मस्तिष्क का खोखला होना जरूरी है शायद ? वेद कबीर कहता है मन का मन में तब रहता है जब मन चाहे, मन मनमानी तब करता है जब हम चाहे, मन के घोड़े की ढीली की जो लगाम तूने मनमर्जियां करेगा तुझको ही ले उड़ेगा
राम से हमारा क्या रिश्ता है
2024/02/18
हृदय में राम मन में राम राम राम जय जय श्री राम राम जी से हमारा जो संबंध है वह ऐसा ही है जैसा हृदय का धड़कन से जैसा कि विश्वास का शरीर से जैसा की मां का रचनाओं से जैसा कि मस्तिष्क का ज्ञान से विज्ञान से जैसा की हमारे संस्कारों का हमसे जैसा कि हमारे देश का हमसे जैसा कि ऋषि मुनियों का संतों का योगो का और गुरुओं का हमसे सो राम सिमर मन राम बसें मेरे रोम रोम, रामानंदम राम हृदयंगम राम जी धरा व्योम आंख मूंद के दीर्घ श्वास लीजिए नाभि में एक झंकार होगी राम नाम की मूलाधार चक्र से हर चक्र तक राम गुंजन होगा फिर और राम कृपा उत्तर अपने स्नेह से भिगोती रहेगी हम सबको आपका वेद कबीरा
किसान मणिपुर हम और हिंदुस्तान
2024/02/16
मेरे प्यारे वेद कबीर पॉडकास्ट को सुनने वालों नेत्र, नाक, जीभ, कान और त्वचा अर्थात् दृश्य, सुगंध, स्वाद, श्रवण और स्पर्श प्रिया श्रवण करता जिस विषय को मैं आज आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं उसे आप सब लोग देखते भी हैं सुनते भी हैं सोते भी हैं बोलते भी हैं पढ़ते भी हैं और उसका स्पर्श भी महसूस करते हैं लेकिन आप ना तो उसका विरोध करते और ना ही उसका कोई समाधान करते हैं आप जो सांस ले रहे हैं वह केमिकल्स और आर्सेनिक से भरी है आप जो पानी पी रहे हैं वह भी उतना शुद्ध नहीं है आप जिन मेट्रो सिटीज में रह रहे हैं वह सही मालूम है मौत के घर हैं जो धीमे जहर की तरह हम सभी की नसों में प्रवेश कर चुके हैं हमारे विचारों में उनका खास स्थान है हमारे फेफड़ों में वह उथल-पुथल मचा रहे हैं इस पॉडकास्ट को सुनने के बाद आपको आभास होगा की आप और आपके बच्चे कितने बड़े खतरे में जी रहे हैं और एक बात मैं आपको बता देता हूं हर महानगर के आसपास के गांव बिक चुके हैं या बिक रहे हैं जहां पर बिल्डर बिल्डिंग के उग रहे हैं और हमें ललित कर रहे हैं क्या हो गांव जैसा ही माहौल में फ्लैट खरीदो फार्म हाउस खरीदो
बसंत पंचमी का उद्देश्य
2024/02/14
बसंत पंचमी मां सरस्वती मंत्रोचारण मां सरस्वती की पूजा सिर्फ विद्यार्थियों के लिए नहीं बल्कि समस्त मानव समाज के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मनवाणी पर नियंत्रण रहता है हमें अपनी मनवाणी का ज्ञान होता है हम क्या सुन रहे हैं क्या उसे समझ रहे हैं और कैसे उसे समझ और समझने के बाद कैसे उसे बोले जो पढ़ रहे हैं उसे कैसे अपने मस्तिष्क में सममूल्य यानी पूरी एकाग्रता और स्मरण शक्ति के साथ और फिर उसका सदुपयोग सफलताओं के लिए करें मानव समाज के उद्धार के लिए करें मां सरस्वती की कृपा से आज जो मैंने पॉडकास्ट आपके लिए रिकॉर्ड किया है वह बहुत ही लाभकारी होगा सभी के लिए मां सरस्वती का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे ओम माहा सरस्वती नमः
24 तत्व ही 24 अवतार हैं
2024/02/10
भगवान विष्णु को सृष्टि का संचालक माना है ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा सृष्टि बनाने वाले विष्णु सृष्टि का पालन और शिव संहार करने वाले है। शास्त्रों में विष्णु के 24 अवतार बताए हैं ऐसा कहा जाता है कि जब जब पृथ्वी पर कोई संकट आता है तो भगवान अवतार लेकर उस संकट को दूर करते है। सवाल ये है कि भगवान विष्णु के अवतारों की संख्या 24 ही क्यो है ज्यादा या कम क्यों नहीं। इसके पीछे जो कारण बताया जाता है वो मानव शरीर की रचना व उसके संचालन से जुड़ा है। कई विद्वानों और संतों का ऐसा मत है कि विष्णु के 24 अवतारों में मानव शरीर की रचना का रहस्य छुपा है। शास्त्रों ने मानव शरीर की रचना 24 तत्वों से जुड़ी बताई है। ये 24 तत्व ही 24 अवतारों के प्रतीक हैं। क्या हैं ये 24 तत्व: माना जाता है कि सृष्टि का निर्माण 24 तत्वों से मिलकर हुआ है इनमें पांच ज्ञानेद्रियां(आंख,नाक, कान,जीभ,त्वचा) पांच कर्मेन्द्रियां(गुदा,लिंग,हाथ,पैर,वचन) तीन अंहकार(सत, रज, तम) पांच तन्मात्राएं (शब्द,रूप,स्पर्श,रस,गन्ध)पांच तत्व(धरती, आकाश,वायु, जल,तेज) और एक मन शमिल है इन्हीं चौबीस तत्वों से मिलकर ही पूरी सृष्टि और मनुष्य का निर्माण हुआ है। "यह तन काचा कुंभ है, लियाँ फिरै था साथि। ठपका लागा फुटि गया, कछू न आया हाथि।। कबीरदास कहते हैं कि हे मानव! यह शरीर, जिसे तू बड़े गर्व के साथ लिये घूम रहा है, कच्चे घड़े के समान है, जो जरा-सा धक्का लगने से फूट जाता है और फिर कुछ भी हाथ नहीं आता। तेरा शरीर भी वैसा ही नश्वर है। इसका कोई ठिकाना नहीं।" जीवाणु शक्ति: हमारे शरीर में जीवाणु शक्ति वास करती है जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। प्राण शक्ति: हमारे शरीर में प्राण शक्ति वास करती है जो हमारे शरीर को जीवित रखने के लिए ज़रूरी है। यह हमारे श्वसन, हृदय धड़कन और अन्य शारीरिक क्रियाओं को नियंत्रित करती है। ऊर्ज
मौनी अमावस्या पर विशेष मंत्र
2024/02/08
मौनी अमावस्या पर ध्यान उपवास दान और बुजुर्गों का मान सम्मान पितरों और पुरखों के लिए उनकी आत्मा शांति और मोक्ष के लिए तर्पण हेतु मंत्रों का उच्चारण बहुत ही महत्वपूर्ण है शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि मौनी अमावस्या के दिन यदि हम भारतीय पूरी निष्ठा से इन सब नियमों का अनुसरण करें जो शास्त्रोक्त हैं तो इसका लाभ कई सौ साल की जाने वाली तपस्या जितना मिलता है मैंने इसमें कुछ मत्रों का उच्चारण किया है आप भी उन मत्रों का उच्चारण कल सारे दिन करें यदि वर्तमान समय की व्यस्तता के कारण आप यह न कर पाए तो आप इस ऑडियो को /पॉडकास्ट को अपने घर, अपने कार्यालय या अपने व्यवसाय में जरूर चलने दें जिससे कि आपके कानों में पड़ता रहे और जिससे कि वातावरण को यह शुद्ध कर दे और इसे अधिक से अधिक लोगों के साथ में आप साझा भी (share) कीजिए आपका वेद कबीरा
कर्ज़ मुक्ति और अर्जुन छाल
2024/02/07
हमारे देश में जो धर्म और आयुर्वेद व प्राकृतिक विज्ञान इन सबको एक दूसरे से जोड़कर देखा जाए तो विश्व में इतना सशक्त वैज्ञानिक आधार किसी भी धर्म का नहीं है हमारे यहां हर पेड़ पौधे में कुछ ना कुछ औषधीय गुण है औषधि गुणों के साथ-साथ उनमें नकारात्मकता को मिटाने के गुण और शक्तियां भी है यहां अर्जुन छाल के विषय में बताया गया है की अर्जुन छाल से छोटे-छोटे उपाय करने से किस तरह हमें पैसे की समस्या से या कर्ज से मुक्ति मिल सकती है बशर्ते कि हम अपने कर्म वाले धर्म को पूरी मेहनत से निभाएं और इसके अलावा व्यायाम करके अपने शरीर को सशक्त और स्वस्थ रखें डॉक्टर वेद थापर 🪖🇮🇳🌳
कौआ मांस बाज़ और गरुड़
2024/01/25
जिंदगी की कहानी भी कुछ ऐसे ही है जहां हम समय पर निर्भर करते हैं उन लोगों पर निर्भर करते हैं जो शायद ही हमें मदद कर पाए या फिर हम अपने भय असुरक्षा और क्रोध में आलस्य के साथ शनैः शनैः डूब जाते हैं समय ना तो किसी अवधि में बंधा है ना ही किसी का गुलाम है समय समय की चाल को क्षण में घंटे में दिनों में महीनों में और सालों में हमने तब्दील किया है समय का रूप सिर्फ समय ही है समय सिर्फ एक विचार पर आधारित है और वह विचार है निरंतरता समय की इस गति के साथ हम कितनी निष्ठा से बढ़ रहे हैं यह हमारी सफलता देखकर पता चलता है या असफलता देखकर पता चलता है कि हम समय से कितने पीछे रह गए हैं वेद कबीर का कहना है की समय रहते जो नहीं चेता उसने को दिया अपना खेता
धर्म क्या है ?
2024/01/17
महाकवि कालिदास ने अपने महाकाव्य- 'कुमारसम्भव' में एक अनुपम बात लिखी- 'शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनम्' अर्थात् शरीर ही धर्म का पहला और उत्तम साधन है। व शरीर ही धर्म को जानने का माध्यम है। इस तन में ही हम अपनी वास्तविकता को समझ सकते हैं कि हम कौन हैं, कहाँ से आए हैं और कहाँ जाना है? अब भला ऐसा क्यों कहा गया है, इसे समझने का प्रयास करेंगे.. धर्म का क्या अर्थ होता है? धर्म शब्द 'धृञ्' धातु से निकला है, जिसका मतलब होता है- धारण करना। 'धारणाद् धर्मं इति आहुः' अर्थात् जिसे धारण किया जाता है, वही धर्म है। शास्त्रों में कहा गया है- मनुष्यों में और पशुओं में यदि कुछ भेद है, तो वह है धर्म का। ऐसा क्या है धर्म में? किस धर्म को धारण कर मनुष्य मनुष्य बनता है? विवेकानंद जी ने खरे शब्दों में धर्म को परिभाषित किया- 'Religion is the Realization of God- धर्म परमात्मा की प्रत्यक्षानुभूति है।' आत्मा की ब्रह्मस्वरूपता को जान लेना, उससे तद्रूप हो जाना, उसका साक्षात्कार कर लेना - यही वास्तविक धर्म है। इस शरीर के माध्यम से ही उस वास्तविक धर्म, ईश्वर व जीवन के वास्तविक लक्ष्य तक हम पहुँच सकते है। इसलिए हमारे शास्त्रों में मानव तन की इतनी महिमा गाई गई है।
Swami Vivekanand ji
2024/01/12
Resolutions 2024
2023/12/22
सुप्रभातम गुणिजन नए साल का पदार्पण होने ही वाला है हर साल हम संकल्प लेते हैं हम कितना उसे पूरा कर पाते हैं यह इस बात पर निर्भर है कि हम कितने अनुशासित हैं समय तो समय है समय में समय बदलता है समय बढ़ता है समय पुकारता है समय निहारता नहीं समय बढ़ता चला जाता है समय की गति अबाध्य है समय सी कोई शिक्षा नहीं समय सा कोई शिक्षक नहीं समय सा कोई साथी नहीं समय सा कोई ग्रंथ नहीं समय सा कोई अपना नहीं और समय से कोई ऊर्जा नहीं समय ऐसा कोई मार्गदर्शन नहीं समय ऐसा कोई संत नहीं यदि हम समय का सिर्फ 75% भी सदुपयोग कर लें तो हमारी गिनती विश्व के महानतम लोगों में हो सकती है और यही तो हमारी चाहत होती है हम महानतम बने लेकिन उसके लिए संघर्ष भी हमें ही करने होंगे खुद को उस योग्य बनाने के लिए आपका वेद कबीरा निरंतर प्रयत्नशील है समय-सा वंदे साहसम 🌞 वंदे मातरम भूमि🪖🇮🇳🌳
Sarcopenia
2023/12/17
Sarcopenia आपको एक बात समझाना बहुत जरूरी है कि जब आप छोटे होते हैं तो मांसपेशियां हड्डियों का बढ़ना एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है और यह इंसानी रचना इंसान ने शरीर में इसका होना निश्चय ही होता है लेकिन जो जो उम्र बढ़ती है पहले ऐसा हुआ करता था कि 60 के ऊपर यह समस्या बहुत आती थी अभी यह 30 और 40 में भी आहिस्ता आहिस्ता इसका बढ़ाना शुरू हो जाता है और उसके पीछे वजह है हमारे जीवन जीने का तरीका means life style लंबे समय तक हमें बैठकर काम करना होता है और उसको छोड़ नहीं जा सकता वरना जिंदगी चलेगी नहीं क्योंकि पैसा नहीं कमा पाएंगे हम जैसे छोटे बच्चों को 5 साल की उम्र तक रोजाना मालिश करना बहुत जरूरी होता है इसी तरीके से आजकल 30 की उम्र के बाद फिजिकल थैरेपी या मसाज अति महत्वपूर्ण है, खान-पान पर नियंत्रण और एक अच्छे प्रशिक्षक द्वारा व्यायाम सीखना बहुत जरूरी है अर्थात् प्राकृतिक तरीके से अनुशासनात्मक जीवन शैली हमें लंबे समय तक स्वस्थ जीवन प्रदान कर सकती है 🌳🌞🍀वेद निसर्गम

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