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Kahani Wali Kudi !!!(कहानी वाली कुड़ी)

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Categories
Country
India
This podcast has
61 episodes
Language
Hindi
Explicit
Yes
Date created
2021/03/09
Latest episode
2026/07/19
Average duration
6 min.
Release period
31 days

Description

*कहानीनामा( Hindi stories), *स्वकथा(Autobiography) *कवितानामा(Hindi poetry) ,*शायरीनामा(Urdu poetry) ★"The Great" Filmi show (based on Hindi film personalities) मशहूर कलमकारों द्वारा लिखी गयी कहानी, कविता,शायरी का वाचन व संरक्षण ★फिल्मकारों की जीवनगाथा ★स्वास्थ्य संजीवनी

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Last epi-9 "सकीना" मक़सद ए ज़िंदगी
2026/07/19
क्या सोचा सकीना ने? सकीना अशरफ़ के साथ गई ? क्या था सकीना का मक़सद ए ज़िंदगी?
क्या करे सकीना ???
2026/06/25
सकीना हमारे आसपास का ही अफ़साना है ,सुनिए सकीना की सिलसिलेवार कहानी और अपनी राय दीजिए कि सकीना क्या करे ? किस्मत नेे एक बार फिर अशराफ़ के सामने ला खड़ा किया है , क्या सकीना अशराफ़ के साथ चली जाए ? या उसे आईना दिखाए ? किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले 1 से 8 तक "सकीना" मक़सद ज़िंदगी का ,अफ़साना की सिलसिले वार किस्त जरूर सुनें अपनी राय भेजें [email protected]
EPI -8 "सकीना" मक़सद ए ज़िंदगी
2026/06/24
आज एक बार फिर अशराफ़ सकीना के सामने था । क्या करेगी सकीना ? क्या अशरफ़ सकीना को साथ ले जाएगा? क्या सकीना उसके साथ जाएगी?
EPI-7 "सकीना"- मक़सद ए ज़िंदगी
2026/06/24
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद ऐसा क्या हुआ जिससे सकीना के लिए सारे रास्ते बंद हो गए थे , मैडम रायज़ादा ने क्या किया कि 10 साल के भीतर सकीना कुछ और ही बन गई .... क्या था सुभान साहब के मेल में जो सकीना को मुसलसल बेचैन किए हुए था , कौन था वो शख्स जो सुभान साहब के साथ स्कूल के जलसे में आने वाला था ......
epi 6 "सकीना" मक़सद-ए-ज़िंदगी
2026/04/22
ज़िंदगी के तज़ुर्बात ने सकीना को ऐसे सबक सिखाए थे जो उसकी उम्र मुक़ाबले बड़े थे। सारी राहें उसके लिए ला-रास्ता थीं। क्या करे सकीना, कहां जाए सकीना उसे रहनुमा की ज़रूरत है, बराये मेहरबानी 🙏 उसकी मदद करें, कमेंट्स में अपनी राय लिखें
epi -5"सकीना" मक़सद ए ज़िंदगी
2026/04/22
हालात सकीना को उस दायरे में ले आए हैं जहां से कोई राह नहीं निकलती, क्या करे सकीना? अपनी राय दीजिए🙏
"सकीना"- मक़सद ए ज़िंदगी (चौथी किस्त)
2026/04/18
कम तालीमयाफ्ता सकीना निकाह के बाद अशरफ़ के साथ गुरुग्राम आ गई । शहर में जिंदगी किस रूप को धर के उसके सामने आई....
"सकीना" मक़सद -ए -ज़िंदगी (तीसरी किस्त)
2026/04/04
वक़्त जैसा भी हो, बदलता ज़रूर है। बेहद मामूली सी, कम तालीम-याफ़्ता यतीम सकीना निकाह के बाद उस दुनिया में थी जिसके बारे में उसने कभी ख़्वाब में भी नहीं सोचा था। आलीशान हवेली के इकलौते वारिस से निकाह कर जहाँ बेशुमार दौलत और ऐश-ओ-आराम मयस्सर था, वहीं अशरफ़ का रवैया कुछ खिंचा-खिंचा सा था। लेकिन वो सकीना को अपने साथ गुरुग्राम ले आया। गुरुग्राम में वक़्त ने क्या करवट बदली? सकीना व अशरफ़ के ताल्लुक़ात कितनी हसीन हक़ीक़त में बदले.....
"सकीना" मक़सद ए ज़िंदगी, दूसरी किस्त
2026/03/23
स्कूल के ट्रस्ट्री सुभान साहब ने सकीना को एक मेल भेजा ,मेल पढ़ कर सकीना यक -ब -यक पत्थर सी हो गयी ,उसने आँखें बंद कर लीं, गुज़िश्ता यादों के हुज़ूम ने उसे घेर लिया , कौन थी सकीना ,क्या था उस मेल में कि सब कुछ फिल्म की मानिंद उसकीआँखों के सामने से गुज़रने लगा था........
"सकीना" --मक़सद ए ज़िंदगी (पहली किस्त)
2026/03/14
सकीना" ( मक़सद ज़िंदगी का)की पहली किस्त कौन है सकीना सुभान साहब के ईमेल में ऐसा क्या था कि यक-बा-यक सकीना हैरान -ओ -परेशान हो गई । जानने के लिए सुनिये अगले हिस्से
भारत का लाल
2025/10/04
Bharat ka laal is the memoir of Shri LAL BAHADUR SHASTRI when He was serving as a Railway minister of india .This memoir reflects his principled behavior. Lal Bahadur Shastri (2 October 1904 – 11 January 1966) was an Indian politician and statesman who served as the a prime minister of India  from 1964 to 1966.
टाइल बनाम मूर्ति
2025/08/21
social media story
स्वकथा रसीदी टिकट epi -33 (अंतिम भाग)
2025/05/20
मेरे मन का ठीक यही आलम था,जब मैंने कहा, रसीदी टिकट का कायाकल्प होना चाहिए। बहुत सारी घटनाएं और नाम ग़ैर - ज़रूरी हैं। अगले सालों में उन हादसों से भी कहीं बड़े हादसे हुए। अभी भी हो रहे हैं, पर सारा विस्तार ग़ैर ज़रूरी है। बात स्याह ताक़त की है, जो यह सब कुछ करवाती है। अपनी किसी उदासी से मुझे इन्कार नहीं ---- अमृता प्रीतम रसीदी टिकट
स्वकथा, रसीदी टिकट epi-30
2025/05/20
इमरोज़ एक दूधिया बादल है,चलने के लिए वह सारा आसमान भी खुद है,और पवन भी ख़ुद है, जो उस बादल को दिशा मुक्त करती है...... ---- अमृता प्रीतम रसीदी टिकट
स्वकथा, रसीदी टिकट epi-32
2025/05/20
मैं इमरोज़ के चेहरे की ओर ऐसे देख रही थी जैसे कृष्ण को देख रही होऊं।कृष्ण भी वेद से फ़िक्रमंद हुए थे ,पर बुद्ध जी तरह नहीं।कृष्ण ने वासनामय पूजा पाठ से पार जाने की बात कही थी,और आज इमरोज़ भी ज़िंदगी के स्वीकार के साथ केह रहे थे, ' अमृता ,तूने इस उदासी के पार जाना है।जो होता है, होने दे! क़त्ल भी होता है, तो होने दे, मैं तेरे साथ हूं.....'

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