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Baat - Mulakaat

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This podcast has
30 episodes
Language
Hindi
Publisher
Suno India
Explicit
No
Date created
2021/03/26
Latest episode
2024/02/01
Average duration
32 min.
Release period
48 days

Description

जैसा की नाम से जाहिर हे, इस पॉडकास्ट सीरीज में होंगी बातें और मुलाकातें। बातें उन मुद्दों पे जो ज़रूरी हैं लेकिन जिस पर अक्सर बातें नहीं होती या होती हैं तो न के बराबर। बातें उन मुद्दों और विषयों पर भी जिनके बारें में आप जानना चाहते हैं, लेकिन आपको पता नहीं किससे पूछे और किससे बात करें। सुनो इंडिया के इस सीरीज़ "बात-मुलाक़ात" में हम आपकी करवाएंगे मुलाकात ऐसे एक्सपर्ट्स और जानकारों से जो दे सकें आपके सवालों का जवाब और जिनके साथ हो सके ज्वलंत और ज़रूरी मुद्दों पर बातचीत। (As the name suggests, this podcast series will feature conversations and meetings. Conversations on issues which are important but not discussed often. Conversations on topics that you want to know more about, but are not sure about whom/where to ask.  Do tune in to Baat MulaKaat, where you will get to meet and hear experts who can answer these questions and clarify your doubts.)

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छत्तीसगढ़ के हसदेव अरंड जंगल में विरोध प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं ये आदिवासी?
2024/02/01
21 और 22 दिसंबर 2023 को, छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अधिकारियों ने हसदेव अरंड जंगल में कोयला खदानों के दूसरे चरण के विस्तार के लिए सैकड़ों हेक्टेयर ज़मीन में हजारों पेड़ों को काट दिया। पिछले एक दशक से आदिवासी छत्तीसगढ़ में 1,500 किमी से अधिक क्षेत्र में फैले हसदेव अरंड जंगलों को बचाने के संघर्ष का हिस्सा रहे हैं। यह क्षेत्र भारत के आदिवासी समुदायों का घर है, जहां घने जंगलों के नीचे अनुमानित पांच अरब टन कोयला दबा हुआ है।  "बात मुलाकात" के इस एपिसोड में, सुनो इंडिया की स्नेहा रिछारिया आलोक शुक्ला से बात करती हैं, जो छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक हैं और एक दशक से हसदेव आंदोलन से जुड़े हुए हैं। See sunoindia.in/privacy-policy for privacy information.
फोर्टिफाइड चावल - क्यों आदिवासी किसान सरकार द्वारा प्रचारित इस नए चावल को स्वीकार क्यों नहीं कर
2023/12/27
सरकार राशन के चावल में अब उन्हें “फ़ॉर्टिफ़ायड चावल" मिला कर दे रही हैं। सराकर का दावा है की यह चावल विटामिन और आयरन का पाउडर के चूरे को मिला कर फ़ैक्टरी में तैय्यार किया गया हे। यह चावाल खून की कमी और कुपोषण को ठीक करने में मदद करेगा। डॉक्टर और वैज्ञानिको में अभी तक इस पर सहमति नहीं हैं। यह तीन हज़ार करोड़ के बजट की नयी नीति कितनी कामगार होगी, इस पर लोगों में अभी संदेह हे।“बात मुलाक़ात” के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अनुमेहा यादव ने उड़ीसा व झारखंड के किसानों से बातचीत की। गाँव में आदिवासी किसान जो खुद सदियों से धान उगाते आए हैं बताते हैं की वह इस तरीके से पोषण को ठीक करने का सही तरीका नहीं मानते। वह कहते हैं “फ़ॉर्टिफ़ायड चावल" में खाने के गुण, जैसे की पकाने पर चावाल का गाच (स्वाभाविक गोंद) और उसका स्वाद सामान्य चावाल जैसा नहीं ह। गाओं के लोग इस तरह के चावल को पसंद नहीं करते और इसे बाकि खाने से अलग कर देते हैं।     धान व अन्य खाने में पोषण कम होने का कारण तेज़ी से लुप्त होती बीज विविधता और धान को फ़ैक्टरी में सफ़ेद से सफ़ेद बानाने की औद्योगिक क्रम और जल वायु परिवर्तन है। जहां रासायनिक खाद आदि से खेती बदल रही है, वहीं कुछ आदिवासी किसान सूनो इंडिया को बताते हैं की वह पारम्परिक भोजन व बीज बचाने की कोशश भी कर रहें हैं, ताकि पोषण, स्वाद और पर्यावरण बने रहें।  See sunoindia.in/privacy-policy for privacy information.
कृषि के असंगठित क्षेत्र में महिलाओं पर कैसी होती है हिंसा?
2023/10/17
कार्यस्थल पर महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रहे यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण के लिए 2013 में Protection of Women from Sexual Harassment Act, 2013 (PoSH) अधिनियम बनाया गया। PoSH अधिनियम कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए नियोक्ताओं पर कानूनी दायित्व डालता है। लेकिन असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के लिए यह कारगर साबित नहीं होता। बात मुलाक़ात के इस एपिसोड में हम भारतीय कृषि क्षेत्र में महिला श्रमिकों पर हो रही हिंसा की बात कर रहे हैं। फेमिनिस्ट पॉलिसी कलेक्टिव और महिला किसान अधिकार मंच (MAKAAM) ने ग्रामीण महिला श्रमिकों के खिलाफ होने वाली हिंसा का अध्ययन किया। ये स्टडी कृषि क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी और महिलाओं के लिए कार्यस्थल की परिभाषा पर कुछ बुनियादी सवाल खड़े करती है। खेतों में काम करते वक्त महिलाओं पर की जाने वाली हिंसा के क्या स्वरूप हैं? इसके छोटी और लंबी अवधि में क्या मायने हो सकते हैं? इसे समझने के लिए स्नेहा रिछारिया ने नारीवादी कार्यकर्ता सेजल दंड से बात की। See sunoindia.in/privacy-policy for privacy information.
मणिपुर में डॉक्टरों ने राहत शिविरों की स्वास्थ सुविधाओं पर क्यों जताई गंभीर चिंता?
2023/09/07
मणिपुर पिछले चार महीनों से सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में है, जिसके चलते हज़ारों मैतेई और कुकी राहत शिविरों में है। गैर सरकारी संगठन इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट (IDPD) के डॉक्टरों की एक टीम ने 1 से 3 सितम्बर के बीच मैतेई और कुकी क्षेत्रों में राहत शिविरों का दौरा किया। राहत शिविरों का दौरा करने वाले डॉक्टरों के इस समूह ने इनमे रहने वाले लोगों के पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और सामान्य स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बेहद गंभीर रूप से चिंता व्यक्त की हे। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल उपाय नहीं किए गए तो राहत शिविरों में महामारी फैल सकती है। रिपोर्टर स्नेहा रिछारिया ने इन हालातों की गंभीरता और इसके उपायों को समझने के लिए डॉ. शकील-उर-रहमान से बात की। डॉ. शकील इस फैक्ट फाइंडिंग टीम का हिस्सा थे और वर्तमान में IDPD के जनरल सेक्रेटरी भी हैं।  See sunoindia.in/privacy-policy for privacy information.
भारत में किसान-मज़दूरों को कैसे प्रभावित करती है इंटरनेट बंदी?
2023/06/27
2018 के बाद से, दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में भारत में सबसे अधिक बार इंटरनेट बंद किया गया. विरोध प्रदर्शनों से लेकर परीक्षा में नक़ल रोकने तक, भारत में इंटरनेट बंदी होती रहती है. जाहिर है की कई कारणों से सरकारें इंटरनेट बंद करती हैं. लेकिन इंटरनेट का अचानक बंद हो जाना आम लोगों के दैनिक जीवन पर क्या प्रभाव डालता है? ह्यूमन राइट्स वॉच और इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा की इंटरनेट का बंद हो जाना विशेष रूप से निचले तबके के लोगों के लिए बेहद खतरनाक साबित होता है.. कारण है सरकारी योजनाओं का डिजिटलीकरण. बात मुलाक़ात के इस एपिसोड में स्नेहा रिछारिया ने इस रिपोर्ट के सह-लेखक से बात की. See sunoindia.in/privacy-policy for privacy information.
बिहार में क्यों उठ रही है शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग?
2023/05/16
बिहार में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्वी चंपारण जिले के पांच थाना क्षेत्रों में जहरीली शराब से अप्रैल महीने में के तीसरे सप्ताह में कम-से-कम 30 लोगों की मौत हुई. इसके पहले December 2022 में सारण जिले और इसके पड़ोस में हए जहरीली शराब कांड में कम-से-कम 40 लोगों की मौत हुई थी. बिहार में रह-रह कर होने वाली ऐसी घटनाएं बताती हैं कि बिहार में शराबबंदी का एक समय चक्र पूरा हो चुका है. एक तरफ सरकार शराबबंदी कानून का और कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की बात दोहराती है तो दूसरी ओर विपक्ष इसकी समीक्षा से लेकर या इसे खत्म किए जाने की भी मांग करता है। बात-मुलाकात के इस एपिसोड में होस्ट मनीष शांडिल्य शराबबंदी के कई परिदृश्य से आपको रूबरू करवायेंगे। इस एपिसोड में ये सीनियर जर्नलिस्ट सोरूर अहमद, भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद, जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार और सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र सुमन से बात करके शराब बंदी के पुरे परिप्रेक्ष्य को समझने की कोशिश करेंगे।  See sunoindia.in/privacy-policy for privacy information.
राजस्थान का Right to Health Bill डॉक्टरों और मरीजों के लिए क्या मायने रखता है?
2023/04/08
राजस्थान Right to Health Bill 21 मार्च, 2023 को पास किया गया। ये बिल मरीजों के अधिकारों पर जोर देता है और इन् अधिकारों के उचित कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र प्रदान करता है। हालाँकि, 5 अप्रैल को अपनी हड़ताल वापस लेने से पहले 2 सप्ताह से अधिक समय तक निजी डॉक्टरों ने इस विधेयक का विरोध किया है। उन्होंने ने कहा की उनका सरकार के साथ समझौता हो गया हे। बात मुलाकात के इस एपिसोड में सुनो इंडिया की कंसल्टिंग एडिटर मेनका राव ने छाया पचौली से बात की। छाया राजस्थान की एक स्वास्थ्य अधिकार कार्यकर्ता और जन स्वास्थ्य अभियान की प्रतिनधि है। जन स्वास्थ्य अभियान देश भर में स्वास्थ्य अधिकार कार्यकर्ताओं और संगठनों का एक नेटवर्क है। See sunoindia.in/privacy-policy for privacy information.
हल्द्वानी: भारत में निष्कासन और विध्वंस की राजनीति
2023/02/22
इस एपिसोड में, स्नेहा रिछारिया और सुहेल भट हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में 20 दिसंबर को उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए निष्कासन आदेश को समझने के लिए हल्द्वानी जाते हैं। इस एपिसोड के ज़रिये हम भारत में निष्कासन और विध्वंस की राजनीति को गहराई से समझने की कोशिश करते हैं. हम यह भी समझने की कोशिश करते हैं कि क्या यह विध्वंस की राजनीति अल्पसंख्यकों को दबाने का एक ज़रिय बन गयी  है? हम इसके पीछे की राजनीति और वैधानिकता को समझाते हुए इस सब को परिपेक्षय में रखते हैं। हम यह भी देखते हैं कि यहां के लोग रोज़गार, आवास और शिक्षा जैसे मूल भूत मसलों पर क्या सोचते हैं! इस एपिसोड में स्थानीय निवासियों, वकीलों, याचिकाकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक विशेषज्ञों और अन्य लोगों के साथ बातचीत शामिल है। See sunoindia.in/privacy-policy for privacy information.
मानगढ़ नरसंहार: राजस्थान चुनाव से पहले क्यों सुर्खियां बटोर रहा है 'आदिवासी जलियांवाला बाग'?
2023/01/20
नवंबर 1913 के मानगढ़ नरसंहार में भील जनजाति के लगभग 1,500 लोगों की मौत हुई थी। वे अंग्रेजों और क्षेत्र में रियासतों के शासकों द्वारा आदिवासी लोगों के शोषण के विरोध में वहां एकत्रित हुए थे। ब्रिटिश और भारतीय सेना ने प्रदर्शनकारियों पर हमला किया।इस घटना को आमतौर पर 'आदिवासी जलियांवाला बाग' के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह उतना प्रसिद्ध नहीं है। हालाँकि, यह घटना राजस्थान में होने वाले आगामी चुनावों के चलते चर्चा का विषय बानी हुई हे। पिछले साल प्रधानमंत्री ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया था। जबकि राज्य की कांग्रेस सरकार ने मानगढ़ धाम में आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय बनाया हे।  इस घटना के ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व को समझने के लिए बात मुलाकात के इस एपिसोड में होस्ट सूर्यतापा मुखर्जी ने डॉ. जितेंद्र मीणा से बात की। डॉ. जितेंद्र मीणा दिल्ली विश्वविद्यालय के श्याम लाल कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर हैं। See sunoindia.in/privacy-policy for privacy information.
Gambia में बच्चों की मौत भारतीय दवा उद्योग के बारे में क्या कहती है?
2022/10/31
Gambia में भारत में बने कफ सिरप पीने के बाद करीब 70 बच्चों की मौत हो गई | WHO ने अलर्ट जारी कर कहा है कि हरयाणा के Maiden Pharmaceuticals Limited में बने कफ सिरप की गुणवत्ता का स्तर काफी ख़राब था | इन samples के laboratory analysis से पता चला है कि चारों उत्पादों में दूषित पदार्थ diethylene glycol  और ethylene glycol बहुत अधिक मात्रा में है | भारत सरकार ने  इस मामले की जांच शुरू कर दी है और Maiden Pharmaceuticals Limited से सभी उत्पादन को रोक दिया है | ऐसा नहीं है कि इस तरह की यह घटना पहली बार हुई हो | जम्मू में 2020 में cough syrup पीने के बाद 19 बच्चों की मौत हो गई थी। बाद में पता चला कि हिमाचल प्रदेश में Digital Vision नामक कंपनी द्वारा बनाए गए इन सिरपों में Diethylene Glycol बहुत अधिक मात्रा में मौजूद था। 1986 में मुंबई के जेजे अस्पताल में भी ऐसी ही चूक देखने को मिली थी, जिसमें तब 14 मरीजों की मौत हो गई थी। बात मुलाकात के इस एपिसोड में मेनका राव ने एस श्रीनिवासन से बात की। एस श्रीनिवासन गुजरात के वडोदरा में LOCOST, एक कम लागत वाली drug manufacturing कंपनी  के सह-संस्थापक हैं। वह  All India Drug Action Network से भी जुड़े हैं, यह NGOs का एक स्वतंत्र नेटवर्क है जो आवश्यक दवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम करता है। See sunoindia.in/privacy-policy for privacy information.
मितानिन प्रोग्राम ने मेरी ज़िन्दगी बदल दी (Mitanin program changed my life)
2022/09/30
नवगठित राज्य छत्तीसगढ़ में, मितानिन कार्यक्रम नामक सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्यक्रम ने राज्य के स्वास्थ्य स्तर में सुधार करने में मदद की।  मितानिन कार्यक्रम की शुरुआत, पूरे देश में आशा कार्यकर्ताओं को रखने के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के फैसले से पहले की गई है। बात मुलाकात के इस एपिसोड में मेनका राव ने राज्य के वरिष्ठ मितानिनों में से एक मितानिन मुक्ता कुजूर के साथ बातचीत की। वह छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में रहती हैं और उन्हें मितानिन के रूप में काम करते हुए लगभग 20 साल हो  चुके हैं | उन्होंने अपने काम के बारे में विस्तार से बात की ,और बताया कि कैसे कार्यक्रम ने  उनके जीवन को बदल दिया। See sunoindia.in/privacy-policy for privacy information.
काम की ज़िंदगी: जब Urban Company, Salon और Spa महिला "गिग वर्कर्स" ने विरोध जता कर हक़ माँगे
2022/08/30
कंपनियों व विशेषज्ञों का मानना है की इंटरनेट अग्ग्रेगेटर कंपनियों के "गिग वर्क" में "फ़्लेक्सिबिलिटी”, या अपनी मर्ज़ी के घंटे उपलब्ध होने के कारण, यह महिलाओं को ख़ास आकर्षित करेगा, और जो महिलायें पहले से घर का ज़्यादातर कार्यभार सम्भालती हों, वह भी इस से आमदनी कमाने के नए अवसर पाएँगी पुरुषों के मुताबिक आज भी महिलायें गिग वर्क में कम संख्या में हैं। जो महिलाएं "प्लाट्फ़ोर्म" या गिग वर्क में आ रही हैं, आज भी सब कार्य क्षेत्रों में बराबरी के बजाय, सफ़ाई, सलोन, ब्यूटी पार्लर आदि, कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित हैं। "काम की ज़िंदगी" के तीसरी एपिसोड में अनुमेहा यादव ने पैंतीस वर्षीय सीमा सिंह से बातचीत की, जो एक अनुभवी ब्यूटिशन हैं जिन्होंने खुद सलोन का काम सीख कर, 8-10 साल सवंतंत्र काम कर के, अर्बन कम्पनी से एक पार्ट्नर की तरह जुड़ी।अर्बन कम्पनी आज भारत के सब से बड़े सर्विस प्लाट्फ़ोर्म में हैं। यह घर के काम की सुविधाएँ जैसे की सफ़ाई, बिजली का काम आदि, और घर आ कर सलोन जैसी सुविधा ग्राहकों को देती हैं। October 2021 में सीमा और उनके साथ क़रीब सौ ब्यूटिशन व स्पा महिला वर्कर्स एक ऐतिहासिक सार्वजनिक प्रोटेस्ट का हिस्सा बनी। उन्होंने कम्पनी द्वारा 20 प्रतिषित से ज़्यादा कमीशन काटने का विरोध, महीने कुछ बुकिंग बिना किसी दंड के मना करने की आज़ादी, वह उनकी सुरक्षा वह स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा की माँग ले कर अर्बन कम्पनी के हरियाणा में गुरुग्राम ऑफिस पर धरना दिया। सीमा पूछती हैं की “पार्ट्नर" नाम के इस्तेमाल के बावजूद कमिशन, फ़ीस, और कमाई आदि के नियम जब जब कम्पनी बदलती है, तो "पार्ट्नर" से कोई सहमति क्यूँ नहीं लेती? महिला गिग वर्कर्स द्वारा एक प्लाट्फ़ोर्म कंपनी की नीतियों पर सवाल, वह इस स्तर पर खुला विरोध, भारत के किसी शहर में शायद पहली बार दर्ज

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