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LIFEARIA

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This podcast has
57 episodes
Language
Hindi
Explicit
No
Date created
2021/04/11
Latest episode
2022/06/26
Average duration
4 min.
Release period
20 days

Description

तुम-सी मैं, मुझ-से तुम, इक दूजे-से हम...

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दीजिए अपनी ज़ुबां को एक ऐसा स्वाद...जो बदल कर रख दे ज़िंदगानी!! | LIFEARIA
2022/06/26
दीजिए अपनी ज़ुबां को एक ऐसा स्वाद...जो बदल कर रख दे ज़िंदगानी!!  नमस्कार प्यारे दोस्तों, स्वागत है आप सभी का आपके अपने यूट्यूब चैनल "Lifearia" के इस मंच पर जहाँ आज हम पहली दफ़ा बनाने जा रहे हैं एक ख़ासम ख़ास रेसिपी!!!  और आपको बता दें कि ये रेसिपी आपको पूरे यूट्यूब पर कहीं नहीं  मिलेगी! एक ऐसी रेसिपी जो हर घर में देगी एक नया सात्विक स्वाद! तो चलिए करते हैं शुरुवात... सबसे पहले इसमें लगनेवाली अतिआवश्यक सामग्री लिख लीजिए! A Recipe for Life : LIFEARIA --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app
पीर पराई by Dr. A. Bhagwat | LIFEARIA
2022/06/24
नमस्कार प्यारे दोस्तों, माफ़ी चाहती हूं! एक लssssम्बे बेमतलब ब्रेक के लिए! तो कैसे हैं आप सभी ? उम्मीद करती हूं कि प्रभु की कृपा से सब कुशल मंगल है और आप सभी जहाँ भी हैं ख़ुश हैं!, स्वस्थ हैं!.....और हाँ मैं भी ठीक ही हूं!!  क्या यहाँ आपने ग़ौर फरमाया प्यारे दोस्तों ? कि आपसे मिले बग़ैर भी मैं कितनी आश्वस्त हूँ कि आप सभी एकदम स्वस्थ और सुखी ही हैं!! मग़र खुद अपने बारे में मेरा ये ख़याल है कि हाँ! मैं भी ठीक ही हूँ! Read more - https://www.lifearia.com/peer-parai/ --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app
रात....चाँद....और मैं Dr. A. Bhagwat | Moon & Me!
2022/06/24
रात, चांद और मैं (Moon and Me!)   कल रात सोचा कुछ लिखूं चांद पर...!!  और जब दिखा चांद तो नज़रें न कागज़ पर टिकीं न कलम पर....!!  बस ठहर गई आसमां पर....!!  कि पूनम के चांद पर...नहीं लिख्हा जाता पूनम पर.....अमावस पर ही बेहतर होगा..... लिखना चांद पर!..... --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app
सवाल-जवाब 1 | भला कैसे टूट जाते हैं हमारे रिश्ते ?
2022/06/23
एक दफ़ा क्या हुआ कि वो जो पहला था न वो अचानक  चुप हो गया !....तो दूसरी भी ख़ामोश रहने लगी! ये भूल कर कि हर चुप्पी के बाद आवश्यकता होती है कुछ बातों की! सरगोशियों की! और हाँ! मुलाक़ातों की भी! जैसे हर चोट के बाद गरज़ होती है मरहम की! ख़ैर! पता है! फ़िर क्या हुआ ? दोनों ने ही सोच लिया कि  वो एकदूसरे की ज़िंदगी में निभा चुके हैं जितना भी था रोल उनका ! एक रिश्ता जो अब है नहीं!  बस एहसास रह गया था कि वो है! read more - https://www.lifearia.com/how-does-a-relationship-break-in-hindi/ --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app
मिट्टी के दीये by Dr. A. Bhagwat | LIFEARIA
2022/06/23
मिट्टी के दीपक कविता (Poem) by Dr. A. Bhagwat   घर भी मिट्टी के होते हैं! और सपने भी मिट्टी के उनके !  जो मिट्टी के दीए बेचने, प्लास्टिक के बाज़ार में आ जाते हैं! जैसे बारिश में कागज़ की कश्ती लिए आते हैं! लोग इधर आकर उधर से गुज़र जाते हैं! फ़िर दिन दीवाली के कुछ और क़रीब आते हैं! बाजूवाले के प्लास्टिक दीए सारे ही बिक जाते हैं! --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app
सफाई! सफाई! दिवाली की सफाई...! A Poem by Dr. A. Bhagwat
2022/06/22
safai poem ( सफाई कविता ) by Dr. A. Bhagwat  सफाई! सफाई! सफाई! सफाई!   लो शुरू हो गई, दीवाली की सफाई...!   इसके पहले हो घर की सफाई! इसके पहले हो दुकानो की सफाई! --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app
प्यार का गठबंधन by Dr. A. Bhagwat
2022/06/22
गठबंधन.....  भले ही गांठ बांध कर शुरू किए जाते हों रिश्तें! मगर वास्तव में रिश्तों की कोई गांठ नहीं हुआ करती! जिसे खोल कर आज़ाद हुआ जा सके और चुपके से दोबारा बांध कर फिर बन्ध जाया जा सके!! क्योंकि रिश्तों में तो दरअसल गांठ की कोई गुंजाइश ही नहीं होती!! इसीलिए सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी की तर्ज़ पर अक़्सर बस टूट जाते हैं रिश्तें!!! कि उनकी कोई एक्सपायरी डेट तो होती नहीं! जिसका रिन्युअल करवाया जा सके!! --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app
सोचने वाली बात 08 | मास्टर शैफ़ वही बनते हैं, जिन्हें हरी मिर्च और प्याज़ काटने से परहेज़ नहीं होता!
2022/04/18
सोचने समझने वाली बात 08   प्यारे दोस्तों, सादर नमस्कार स्वागत है आप सभी का आपके अपने यू ट्यूब चैनल 'लाइफेरिया' के इस मंच पर जहां आज हम बढ़ रहे हैं एक और बेहद जरूरी और सोचने वाली बात की ओर पर इससे पहले की मैं शुरुआत करूँ मैं आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया अदा करती हूँ आपके साथ,सहयोग, समर्थन और प्रोत्साहन का जिसके लिए लाइफेरिया आपका शुक्रगुज़ार रहेगा हमेशा हमेशा ! तो चलिए करते हैं शुरुआत... --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app
सोचने वाली बात 07 | क्या करें ? जब ग़लत समझ बैठे लोग हमें ! या नहीं समझे वैसे, जैसे हम हैं ! LIFEARIA
2022/04/18
बहुत गफ़लत होती है!, बेहद परेशानी! बड़ी बैचेनी! एक तरह से उलझन में डाल देनेवाली स्थिति, जब लोग कोई ग़लत राय बना लेते हैं हमारे बारे में! कोई टैग लगा देते हैं हम पर! या फ़िर सोचने लगते हैं कुछ ऐसा हमारे बारे में जैसे हम वास्तव में हैं ही नहीं ! फ़िर चाहे वो हमारे घरेलू मामले हों, रिश्तेदार हों,सहकर्मी हों,या फ़िर पड़ोसी कोई....लोगों की इसतरह की ग़लतफ़हमी या फ़िर कभी कभी खुशफ़हमी का हम आए दिन शिकार होते रहते हैं! अब सोचनेवाली बात यह है कि हम ऐसे तथाकथित लोगों, ऐसी परिस्थितियों से आख़िर कैसे निपटें? --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app
अपनी ख़ुशी से अपना ही दिल तोड़ना पड़ा! LIFEARIA
2022/04/17
आंखें बंद थी! पलकों पर झूल रहे थे ख़्वाब... होंठों पर मिलने की आस....मुस्कान बन कर महक रही थी! एक दूजे को याद कर फूले नहीं समां रहे थे हम.... एक लंबा सफ़र जो तय किया था ,इक दूजे के बग़ैर....अब ख़त्म होने को था ! मन्नते सच होने जा रही थी ! दुआएं क़ूबुल होने को थीं ! जो रची नहीं थी अबतक हाथों में वो मेहंदी खिलने लगी थी ज़हन में और सपना वो हक़ीक़त होने को था  जब ....वहीं ज़िन्दगी के उसी हसीन मोड़ पर ,ठिठक कर क़दम रोक लिए थे हमनें कि अपनी ख़ुशी से अपने ही दिल तोड़ लिए थे हमनें!  फ़क़त अपना ही ख़याल होता तो कुछ और बात होती! कुछ और दिन होते, कुछ और रात होती! --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app
तुम्हें खोने की हिम्मत नहीं है मुझमें, फ़िर भला तुम्हें पाने की ज़ुर्रत क्यों करूँ!
2022/04/17
जानते हो? हर दफ़ा तुम्हें पा लेने के मेरे ख़्वाब, बस तुम्हें खो देने के डर से ही टूटे हैं! तो अब पूरी शिद्दत से चाहती हूं मैं, बरक़रार रखना अपने दिल में तुम्हारी चाहत को ,तुम्हें पाने की कोशिश के बग़ैर! जैसे अक्सर बियाबान जंगलों में ही खिला करती हैं, महकते फूलों की हसीन वादियां, ये जानते हुए भी कि उन्हें देखने कोई नहीं आएगा! कोई आस की बाती जलती रहती है फ़क़त तेल की आख़री बून्द की ख़ातिर,दिये को ख़बर हुए बग़ैर ही! क्योंकि वास्ता उसका रोशनी से हुआ करता है! --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app
थप्पड़ परम्परा - Thappad
2021/11/21
"थप्पड़ परम्परा!" दिल के नक़्शे को बदल कर रख दिया है, गालों पर पड़े थप्पड़ ने! हाँ! अभी  "थप्पड़" देख रही हूं  मैं! यूँ तो अकेली ही हूँ....! पर यूँ लग रहा है कि जैसे कई कई ...शायद हज़ारों स्त्रियां मेरे भीतर हैं जो देख रही हैं...हज़ारों साल.....कई सदियां....कई युग ...पीछे जाकर! read more - https://www.lifearia.com/thappad/ --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app

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