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Poet Pankaj Show

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This podcast has
9 episodes
Language
Hindi
Publisher
pankaj jain
Explicit
No
Date created
2021/05/13
Latest episode
2021/11/12
Average duration
3 min.
Release period
24 days

Description

This podcast is for those who love poetry in any form .I think poetry is the best way to express human emotions.

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कुछ दोस्त
2021/11/12
कुछ दोस्त ऐसे भी होते हैं जो वक़्त के साथ रंग बदल जायगे जब वक़्त अच्छा हो तो आप की हर हा में भी हा मिला लेगे हैं जब वक़्त बुरा हो तो पीठ दिखाकर पतली गली से निकल  जायगे
परवाह
2021/08/28
परवाह उनकी करो जो तुम्हारी परवाह किया करते हैं
हमने तुमसे प्यार किया
2021/08/01
वो कहते हैं हमने तुमसे प्यार किया लेकिन कमबख्त जब नज़रों से नज़रें मिलीं तो कब इकरार किया लब भी फड़फड़ाए लेकिन इज़हार तो नहीं किया वो कहते थे बांहों में भर लेंगे तुम्हें पास आए तो हाथ पकड़ने से भी इनकार किया इतनी शर्तें रख दी फिर भी कहते हैं हमने तुमसे प्यार किया
बदल जा
2021/06/08
ठहर जा संभल जा बदल जा नहीं तो ये वक़्त तुझे बदल जाएगा तू सोचता था तुम मालिक है इस धरती का जो चाहे वो कर पाएगा कभी सोचा था तूने तो दर्द से यूँ कह कर आएगा 1-1 सांस के लिए तो गिड़गिड़ाएगा मौत के तांडव से तू डर जाएगा तू अकेला आया था अकेला ही जाएगा अपनी नादानियों से कब पार पाएगा अभी भी वक्त है ठहरजा संभलजा बदल जा नहीं तो ये वक़्त तुझे बदल जाएगा
Manzil
2021/05/23
मंज़िल हो दूर तो थोड़ा ठहर जाना अच्छा है रास्ते में मिले राहगीरों से मिलना मिलाना अच्छा है अपनी कहानियां सुनाना और उनकी कहानियां सुनना अच्छा है पक्षियों का चहचहाना खेतों का लहलहाना अच्छा है थक हार कर अपनी प्यास बुझाना अच्छा है गालिब की शायरी गुनगनाना अच्छा है पहली बारिश में भीग जाना अच्छा है नए रास्तों से गुजर जाना अच्छा है हरी भरी वादियों में खो जाना अच्छा है ऊबड़ खाबड़ रास्तों पर गिरकर संभल जाना अच्छा है नई साँसें भर के फिर आगे बढ़ जाना अच्छा है मंज़िल हो दूर तो थोड़ा ठहर जाना अच्छा है
Waqt Gujar jayega
2021/05/16
बुरा हो या अच्छा वक्त तो गुज़र जाएगा । सिरहाने पर सिर रख के तू फिर सो जाएगा । सुबह जब आँख खुलेगी तो अँधेरा छंट जाएगा । सूरज की रोशनी में ये उपवन फिर लहलहाएगा । हर डाली डाली पे फूल फिर महक जाएगा । अंधेरा तो दूर दूर तक नजर नहीं आएगा । अपनों का साथ पाकर तू फिर मुस्कुराएगा । सावन की उस पहली फुहार में तू झूम के गाएगा। बुरा हो या अच्छा वक्त तो गुज़र जाएगा । सिरहाने पर सिर रख के तो फिर सो जाएगा ।
Ha Maine maut ko karib se dekha hai
2021/05/13
हां मैंने मौत को करीब से देखा है। जो कहते थे नाज है। हमें अपनी हस्ती पर उनकी हस्ती को मिटते मैंने देखा है। मासूमों के सिर से मां बाप के साए को उठते मैंने देखा है। कई सुहागिनों को विधवा होते मैंने देखा है। हां साहब मैंने मौत को करीब से देखा है। जो कहते थे।खरीद लेंगे इस दुनिया को उनको एक -एक सांस की भीख मांगते मैंने देखा है। शमशान के आगे लगी लंबी-लंबी कतारों को मैंने देखा है। और कुछ कपटी नेताओं को लाशों पर राजनीति करते मैंने देखा है। हां साहब मैंने मौत को करीब से देखा है । जो कहते थे। दिल्ली के मालिक हम है। उन नेताओं को अपने कर्तव्यों से भागते मैंने देखा है। और कुछ गिद्धों को दवाइयों और ऑक्सीजन की कालाबाजारी करते मैंने देखा है । अस्पतालों के बाहर नो बेड नो ऑक्सीजन का बोर्ड मैंने देखा है। हां साहब मैंने मौत को करीब से देखा है। निडर डॉक्टर और नर्सों को मरीजों की सांसे बचाते मैंने देखा है। अपनों से बिछड़ने का गम क्या होता है। इस कोरोना काल में मैंने देखा है । कई जिंदगियों को खत्म होते मैंने देखा है । हां साहब मैंने मौत को करीब से देखा है। हां साहब मैंने मौत को करीब से देखा है।
Introduction-Poet Pankaj show
2021/05/06
This just an introduction to my podcast channel called poet pankaj show.this podcast channel is for poetry lover and much more.
Poet Pankaj Show (Trailer)
2021/05/05

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