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Vinay Iztirar

Advertise on podcast: Vinay Iztirar

Categories
Country
India
This podcast has
37 episodes
Language
Hindi
Date created
2020/07/13
Latest episode
2021/08/04
Average duration
11 min.
Release period
20 days

Description

Its all about life stories. Love is everywhere.

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किशोर कुमार
2021/08/04
जानिए आखिर क्यों एमरजेंसी के समय किशोर कुमार के गीतों पर लगा दिया गया था बैन ? जयंती पर विशेष किशोर कुमार हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली हरफनमौला कलाकारों में शुमार हैं। किशोर ने फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर एंट्री की थी। किशोर कुमार की पहली फिल्म #शिकारी' 1946 में रिलीज हुई थी। फिल्म में किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार लीड रोल में थे। किशोर कुमार को पहली बार देव आनंद की फिल्म '#जिद्दी' (1948) में गाने का मौका मिला। आपातकाल में लगा था बैन 4 अगस्त को मध्य प्रदेश के #खंडवा शहर में जन्मे #किशोर_कुमार ने एक से बढ़कर एक हिट गाने दिए लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब उनके गानों को बैन कर दिया गया था। 1975 में जब इंदिरा गांधी सरकार ने आपातकाल लगा दिया था। तो इसके शिकार किशोर कुमार भी हुए थे। दरअसल, आपातकाल के दौरान कांग्रेस चाहती थी कि सरकारी योजनाओं की जानकारी किशोर कुमार अपनी आवाज में गाना गाकर दें।उस दौरान सूचना प्रसारण मंत्री #वीसी_शुक्ला थे। उन्होंने किशोर कुमार के पास संदेशा भिजवाया कि वो इंदिरा गांधी के लिए गीत गाएं जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक सरकारी की आवाज पहुंचे लेकिन किशोर कुमार ने गाना गाने से मना कर दिया। किशोर कुमार ने संदेश देने वाले से पूछा कि उन्हें ये गाना क्यों गाना चाहिए तो उसने कहा, क्योंकि वीसी शुक्ला ने ये आदेश दिया है। आदेश देने की बात सुनकर किशोर कुमार भड़क गए और उन्होंने उसे डांटते हुए मना कर दिया। यह बात कांग्रेस को इस कदर नागवार गुजरी कि उन्होंने किशोर कुमार के गाने ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर बैन कर दिए। यह बैन 3 मई 1976 से लेकर आपातकाल खत्म होने तक जारी रहा। किशोर कुमार के गाने ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर नहीं चलाए जाते थे। अपनी धुन के पक्के किशोर कुमार ने एक बार कहा था, 'कौन जाने वो क्यों आए लेकिन कोई
साहिर लुधियानवी
2021/06/10
आज रूबरू होते हैं, साहिर साहब की ज़िंदगी के कुछ दिलचस्प पहलुओं से और उनके लेखन की गहराइयों से, ज़िन्दगी का ऐसा कोई पल नहीं जिसपर उन्होंने न लिखा हो। अपने पति फज़ल मोहम्मद से तलाक के बाद इनकी माँ अपने भाई के पास आकर रहने लगीं. साहिर का बचपन भी दूसरे बच्चों से कुछ अलग ही रहा। बचपन में जब उन्हें दूध दिया जाता तो कहते कि इसमें पानी मिलाओ और जब पानी मिलाया जाता तो कहते कि अब इसको अलग करो। उनकी मां उन्हें सर्जन या जज बनाना चाहती थीं, लेकिन किस्मत 'अब्दुल हई' को कुछ और ही बनाना चाहती थी। साहिर को अपना नाम इकबाल की एक नज़्म से मिला जो उन्होंने अपने उस्ताद दाग देहलवी की शान में लिखी थी। इसमें उन्हें 'साहिर' नाम बहुत पसंद आया जिसका मतलब होता है 'जादूगर' यहीं से उन्होंने नए नाम को अपना लिया और इसके साथ जोड़ लिया शहर ए पैदाइश ‘लुधियानवी’। 'चल बसा दाग,अहा! मय्यत उसकी जेब-ए-दोष है आखिरी शायर जहानाबाद का खामोश है इस चमन में होंगे पैदा बुलबुल-ए-शीरीज भी सैकडों साहिर भी होगें, सहीने इजाज भी हूबहू खींचेगा लेकिन इश्क की तस्वीर कौन' मशहूर शायर 'कैफी आजमी' ने 'तल्खियां' की तारीफ में कहा था ~ 'मैं अक्सर यह सोचने पर मजबूर हो जाता हूं कि मैं साहिर को उनकी शायरी के जरिये जानता हूं या फिर उनकी शायरी को खुद उनके जरिये से? मैं यह कबूल करता हूं कि इस बारे में मैं अभी तक किसी नतीजे पर नही पहुंचा हूँ। ऐसा महसूस होता है कि, साहिर ने अपनी शख्सियत का जादू अपनी शायरी में उतार दिया है और उनकी शायरी के जादू का अक्स उनकी शख्सियत में हूबहु उतर आया है। तल्खियां पढते वक़्त ऐसा महसूस होता है कि शायर की रुह अपनी बुलंद तथा साफ आवाज में बात कर रही है' साहिर को जब पंजाब में दंगों की खबर मिली तो वह बहुत परेशान हुए उन्होंने लिखा ~ 'ये जलते हुए घर किसके हैं, ये कटे हुए तन किसके हैं तकरीम के अंधे त
परेशानी में रास्ता
2021/04/06
एक शहर में एक अमीर आदमी रहता था। उसको पैसों का बहुत घमण्ड था। एक बार किसी कारण से उसकी आँखों मे इन्फेक्शन हो गया और उसकी आँखों मे बुरी तरह जलन होने लगी। वह कई डॉक्टरों के पास गया, लेकिन किसी भी डॉक्टर को उसकी परेशानी समझ नही आयी। वह बहुत परेशान होने लगा। वह अपना इलाज कराने विदेश चला गया। वहाँ एक बड़े डॉक्टर ने उसकी आँखे देखी और कहा – मैंने अपनी पूरी लाइफ में अभी तक ऐसा केस नही देखा है। ( वह आदमी बहुत डर जाता है ) वह डॉक्टर से पूछता है – क्या हुआ डॉक्टर। डॉक्टर कहते है – आपकी आंखों में एलर्जी हो गयी है। आप सिर्फ ‘ हरा रंग देख सकते है। यदि आप हरे कलर के अलावा’ दूसरे कलर’ देखोगे, तो आपकी आंखों में जलन होने लगेगी और धीरे-धीरे आपकी आंखों की रोशनी चली जायेगी। ( वह बहुत उदास हो जाता है )। उसके पास पैसा तो बहुत होता है, इसलिए वह पेंटर को बुलाता है और कहता है – तुम इस घर को ‘ हरा कलर ‘ कर दो और जहाँ भी, मैं जाता हूं, पूरी जगह को हरा कर दो। उसने अपनी गली, सड़क ,बोर्ड सब कुछ हरा करवा दिया। उसने बहुत पैसा खर्च कर दिया, फिर भी कोई ना कोई ऐसी चीज रह जाती। जिसको हरा नही किया जा सकता था। जैसे नीला आसमान, खाना खाने के लिए रोटी, और शरीर का कलर, सब चीजों को हरा कलर नही किया जा सकता था। ( उसका हर रोज बहुत ज्यादा पैसा ख़र्च हो जाता था ) एक दिन उसी गली से एक लड़का निकल रहा था। उसने देखा कि, चारो ओर हरा कलर ही क्यों है। उसने वहां कुछ लोगो से पूछा – कि यहाँ चारो ओर ‘हरा कलर’ क्यों है। लोगो ने बताया कि, यहाँ एक अमीर आदमी रहता है। उसकी आँखों मे एलर्जी है। अगर वह हरे कलर के अलावा दूसरा कलर देखता है तो उसकी आँखों मे जलन होने लगती है। इसलिए सब जगह हरा कलर है। वह लड़का उस आदमी के पास जाता है और कहता है – आपने सभी जगह को हरा क्यों कर दिया है। आपकी परेशानी का दूसरा इलाज भी हो सकता है। आपकी परेशा
तीन तरह के लोग
2021/02/20
💫💫💫💫💫💫💫💫💫💫 *👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇* *!! तीन तरह के लोग !!* °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° हम झूठ बोलते हैं क्योंकि सच बोलने पर लोग अक्सर हमारा साथ छोड़ देते हैं। यह विडम्बना है कि झूठ ज्यादा खूबसूरत और मधुर होता है, इसीलिए जल्दी स्वीकार भी हो जाता है... सच कड़वा, तीखा और ज्वलनशील होता है... इसीलिए सच सुनकर वो लोग भी आपसे दूर हो जाते हैं जो कहते फिरते हैं कि "वो आपके साथ हैं".... लोग अकेले पड़ जाने के भय से झूठ बोलते हैं, फिर उसी झूठ को सच मानने लगते हैं, और फिर धीरे - धीरे उसी झूठ में जीने लगते हैं। ज़िन्दगी में हमें तीन तरह के लोग मिलते हैं, एक वो जिन्हें आपसे जुड़ने में रुची होती है, आपसे गप्पे मारने में, टाइम पास करने में... किंतु आपके सच को सुनने में कतई रुचि नहीं होती... ये लोग मौका पड़ने पर "आपकी ज़िन्दगी आप जानों" कहकर भाग जाते हैं... दूसरे लोग वो होते हैं जो आपका सच बड़े प्रेम और भावुकता से सुनते हैं, पर मौका पड़ने पर बड़ी धूर्तता से उसे आपके विरुद्ध प्रयोग करते हैं... ऐसे लोगों को जरा सा भी फर्क नहीं पडता कि उनके इस व्यवहार से, कुटिलता से आप किस हद तक टूट सकते हैं। तीसरा प्रकार उन लोगों का है जो आपकों सुनते हैं, और अपने जीवन अनुभवों से आपकों समझाते हैं, धैर्य रखने की सलाह देते हैं, साथ ही आपके हर निणर्य में आपके नज़रिए को समझने का प्रयास करते हैं, क्योंकि ऐसे लोग वाकई आपको समझते हैं। तीसरे प्रकार के लोग कम ही मिलते हैं... इसीलिए हम झूठ बोलते हैं और झूठ ही जीते हैं... क्योंकि वही सरल है, वही सहज है, वही स्वीकार्य भी है।.... इसीलिए तो संत रहीमदास कहते हैं:- *रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय l* *सुनी इठलैहैं लोग सब, बांटी न लेंहैं कोय ll* *सदैव प्रसन्न रहिये।* *जो प्राप्त है, प्रर्याप्त है।।* ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
राजा और वृद्ध
2021/02/20
1️⃣4️⃣❗0️⃣2️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣ *👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇* *!! राजा और वृद्ध !!* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ठण्ड का मौसम था. शीतलहर पूरे राज्य में बह रही थी. कड़ाके की ठण्ड में भी उस दिन राजा सदा की तरह अपनी प्रजा का हाल जानने भ्रमण पर निकला था. महल वापस आने पर उसने देखा कि महल के मुख्य द्वार के पास एक वृद्ध बैठा हुआ है. पतली धोती और कुर्ता पहने वह वृद्ध ठण्ड से कांप रहा था. कड़ाके की ठण्ड में उस वृद्ध को बिना गर्म कपड़ों के देख राजा चकित रह गया. उसके पास जाकर राजा ने पूछा, “क्या तुम्हें ठण्ड नहीं लग रही?” “लग रही है. पर क्या करूं? मेरे पास गर्म कपड़े नहीं हैं. इतने वर्षों से कड़कड़ाती ठण्ड मैं यूं ही बिना गर्म कपड़ों के गुज़ार रहा हूँ. भगवान मुझे इतनी शक्ति दे देता है कि मैं ऐसी ठण्ड सह सकूं और उसमें जी सकूं.” वृद्ध ने उत्तर दिया. राजा को वृद्ध पर दया आ गई. उसने उससे कहा, “तुम यहीं रुको. मैं अंदर जाकर तुम्हारे लिए गर्म कपड़े भिजवाता हूँ.” वृद्ध प्रसन्न हो गया. उसने राजा को कोटि-कोटि धन्यवाद दिया. वृद्ध को आश्वासन देकर राजा महल के भीतर चला गया. किंतु महल के भीतर जाकर वह अन्य कार्यों में व्यस्त हो गया और वृद्ध के लिए गर्म कपड़े भिजवाना भूल गया. अगली सुबह एक सिपाही ने आकर राजा को सूचना दी कि महल के बाहर एक वृद्ध मृत पड़ा है. उसके मृत शरीर के पास ज़मीन पर एक संदेश लिखा हुआ है, जो वृद्ध ने अपनी मृत्यु के पूर्व लिखा था. संदेश यह था : “इतने वर्षों से मैं पतली धोती-कुर्ता पहने ही कड़ाके की ठण्ड सहते हुए जी रहा था. किंतु कल रात गर्म वस्त्र देने के तुम्हारे वचन ने मेरी जान ले ली.” *शिक्षा:-* मित्रों! दूसरों से की गई अपेक्षायें अक्सर हमें उन पर निर्भर बना देती है, जो कहीं न कहीं हमारी दुर्बलता का कारण बनती है. इसलिए, अपनी अपेक्षाओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के स्थान पर स्वयं को सबल बनाने का
मन की शांति
2021/02/20
एक गरीब आदमी था। वह हर रोज अपने गुरु के आश्रम जाकर वहां साफ-सफाई करता और फिर अपने काम पर चला जाता था। अक्सर वो अपने गुरु से कहता कि आप मुझे आशीर्वाद दीजिए तो मेरे पास ढेर सारा धन-दौलत आ जाए। एक दिन गुरु ने पूछ ही लिया कि क्या तुम आश्रम में इसीलिए काम करने आते हो। उसने पूरी ईमानदारी से कहा कि हां, मेरा उद्देश्य तो यही है कि मेरे पास ढ़ेर सारा धन आ जाए, इसीलिए तो आपके दर्शन करने आता हूं। पटरी पर सामान लगाकर बेचता हूं। पता नहीं, मेरे सुख के दिन कब आएंगे। गुरु ने कहा कि तुम चिंता मत करो। जब तुम्हारे सामने अवसर आएगा तब ऊपर वाला तुम्हें आवाज थोड़ी लगाएगा। बस, चुपचाप तुम्हारे सामने अवसर खोलता जाएगा। युवक चला गया। समय ने पलटा खाया, वो अधिक धन कमाने लगा। इतना व्यस्त हो गया कि आश्रम में जाना ही छूट गया। कई वर्षों बाद वह एक दिन सुबह ही आश्रम पहुंचा और साफ-सफाई करने लगा। गुरु ने बड़े ही आश्चर्य से पूछा- क्या बात है, इतने बरसों बाद आए हो, सुना है बहुत बड़े सेठ बन गए हो। वो व्यक्ति बोला- बहुत धन कमाया। अच्छे घरों में बच्चों की शादियां की, पैसे की कोई कमी नहीं है पर दिल में चैन नहीं है। ऐसा लगता था रोज सेवा करने आता रहूं पर आ ना सका। गुरुजी, आपने मुझे सब कुछ दिया पर जिंदगी का चैन नहीं दिया। गुरु ने कहा कि तुमने वह मांगा ही कब था? जो तुमने मांगा वो तो तुम्हें मिल गया ना। फिर आज यहां क्या करने आए हो ? उसकी आंखों में आंसू भर आए, गुरु के चरणों में गिर पड़ा और बोला- अब कुछ मांगने के लिए सेवा नहीं करूंगा। बस दिल को शान्ति मिल जाए। गुरु ने कहा- पहले तय कर लो कि अब कुछ मांगने के लिए आश्रम की सेवा नहीं करोगे, बस मन की शांति के लिए ही आओगे। गुरु ने समझाया कि चाहे मांगने से कुछ भी मिल जाए पर दिल का चैन कभी नहीं मिलता इसलिए सेवा के बदले कुछ मांगना नहीं है। वो व्यक्ति बड़ा ही
अनोखा दोस्त कौआ
2021/02/20
1️⃣6️⃣❗0️⃣2️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣ *👇👇 आज का प्रेरक प्रसंग 👇👇* *!! अनोखा दोस्त कौआ !!* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ एक कौआ था। वह एक किसान के घर के आँगन के पेड़ पर रहता था। किसान रोज़ सुबह उसे खाने के लिए पहले कुछ देकर बाद में खुद खाता था। किसान खेत में चले जाने के बाद कौआ रोज़ उड़ते-उड़ते ब्रह्माजी के दरबार तक पहुँचता था और दरबार के बाहर जो नीम का पेड़ था, उस पर बैठकर ब्रह्माजी की सारी बातें सुना करता था। शाम होते ही कौआ उड़ता हुआ किसान के पास पहुँचता और ब्रह्माजी के दरबार की सारी बातें उसे सुनाया करता था। एक दिन कौए ने सुना कि ब्रह्माजी कह रहे हैं कि इस साल बारिश नहीं होगी। अकाल पड़ जायेगा। उसके बाद ब्रह्माजी ने कहा - "पर पहाड़ो में खूब बारिश होगी।" शाम होते ही कौआ किसान के पास आया और उससे कहा - "बारिश नहीं होगी, अभी से सोचो क्या किया जाये"। किसान ने खूब चिन्तित होकर कहा - "तुम ही बताओ दोस्त क्या किया जाये"। कौए ने कहा - "ब्रह्माजी ने कहा था पहाड़ों में जरुर बारिश होगी। क्यों न तुम पहाड़ पर खेती की तैयारी करना शुरु करो?" किसान ने उसी वक्त पहाड़ पर खेती की तैयारी की। आस-पास के लोग जब उस पर हँसने लगे, उसे बेवकूफ कहने लगे, उसने कहा - "तुम सब भी यही करो। कौआ मेरा दोस्त है, वह मुझे हमेशा सही रास्ता दिखाता है" - पर लोगों ने उसकी बात नहीं मानी। उस पर और ज्यादा हँसने लगे। उस साल बहुत ही भयंकर सूखा पड़ा। वह किसान ही अकेला किसान था जिसके पास ढेर सारा अनाज इकट्ठा हो गया। देखते ही देखते साल बीत गया इस बार कौए ने कहा - "ब्रह्माजी का कहना था कि इस साल बारिश होगी। खूब फसल होगी। पर फसल के साथ-साथ ढेर सारे कीड़े पैदा होगें। और कीड़े सारी फसल के चौपट कर देंगे।" इस बार कौए ने किसान से कहा - "इस बार पहले से ही तुम मैना पंछी और छछूंदों को ले आना ताकि वे कीड़ों को खा जाये।" किसान ने जब ढेर सारे छछूंदों को ले आया, मैना और प
श्री राम
2021/02/01
जिस समय रावण मरणासन्न अवस्था में था, उस समय भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि इस संसार से नीति, राजनीति और शक्ति का महान् पंडित विदा ले रहा है, तुम उसके पास जाओ और उससे जीवन की कुछ ऐसी शिक्षा ले लो जो और कोई नहीं दे सकता। श्रीराम की बात मानकर लक्ष्मण मरणासन्न अवस्था में पड़े रावण के सिर के नजदीक जाकर खड़े हो गए शिक्षा मिलती है विनम्रता से, अधिकार से नहीं कुछ देर इंताजार और अपने को अपमानित महसूस करने के बाद लक्ष्‍मण श्री राम के पास पहुंचे और बोले, 'भइया! मरणासन्‍न पड़ा है लेकिन इसका का अहंकार...' इससे पहले लक्ष्‍मण अपनी बात पूरी कर पाते श्री राम ने बीच में टोका, 'लक्ष्‍मण मेरे भाई! अहंकार रावण में नहीं तुममे है. विजयी होने का. रावण युद्ध हार चुका है. अब वह हमारा शत्रु नहीं है. तुम उससे कुछ लेने गए थे तो उसके पैरों के पास याचक की मुद्रा में खड़े होते लेकिन तुम तो सिर के पास आदेश वाली मुद्रा में खड़े थे. शिक्षा पाने के लिए अधिकार नहीं विनम्रता की जरूरत होती है.यदि किसी से ज्ञान प्राप्त करना हो तो उसके चरणों के पास खड़े होना चाहिए न कि सिर की ओर।' लक्ष्‍मण बात समझ गए वे तुरंत वहां से जाकर रावण के पैरों के पास खड़े होकर शिक्षा देने के लिए अनुरोध किया. उस समय महापंडित रावण ने लक्ष्मण को तीन बातें बताई जो जीवन में सफलता की कुंजी है! 1-शुभस्‍य शीघ्रम पहली बात जो रावण ने लक्ष्मण को बताई वह ये थी कि शुभ कार्य जितनी जल्दी हो कर डालना और अशुभ को जितना टाल सकते हो टाल देना चाहिए यानी शुभस्य शीघ्रम्। मैंने श्रीराम को पहचान नहीं सका और उनकी शरण में आने में देरी कर दी, इसी कारण मेरी यह हालत हुई। 2-प्रतिद्वंद्वी को कमजोर न समझो दूसरी बात यह कि अपने प्रतिद्वंद्वी, अपने शत्रु को कभी अपने से छोटा नहीं समझना चाहिए, मैं यह भूल कर गया। मैंने जिन्हें साधारण व
महात्मा गांधी की हत्या
2021/01/29
*महात्मा गांधी की पुण्य तिथि पर विशेष -* *"कैसा बीता था महात्मा गांधी का आख़िरी दिन"* *शुक्रवार 30 जनवरी 1948 की शुरुआत एक आम दिन की तरह हुई।* हमेशा की तरह महात्मा गांधी तड़के साढ़े तीन बजे उठे।प्रार्थना की, दो घंटे अपनी डेस्क पर कांग्रेस की नई ज़िम्मेदारियों के मसौदे पर काम किया और इससे पहले कि दूसरे लोग उठ पाते, छह बजे फिर सोने चले गए। काम करने के दौरान वह अपनी सहयोगियों आभा और मनु का बनाया नींबू और शहद का गरम पेय और मीठा नींबू पानी पीते रहे। दोबारा सोकर आठ बजे उठे।दिन के अख़बारों पर नज़र दौड़ाई, और फिर ब्रजकृष्ण ने तेल से उनकी मालिश की। नहाने के बाद उन्होंने बकरी का दूध, उबली सब्ज़ियां, टमाटर और मूली खाई और संतरे का रस भी पिया।शहर के दूसरे कोने में *पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम में नाथूराम गोडसे, नारायण आप्टे और विष्णु करकरे* अब भी गहरी नींद में थे। *पटेल से क्यों मिलने वाले थे, गांधी?* डरबन के उनके पुराने साथी *रुस्तम सोराबजी* सपरिवार गांधी से मिलने आए। इसके बाद रोज़ की तरह वह दिल्ली के मुस्लिम नेताओं से मिले। उनसे बोले, *''मैं आप लोगों की सहमति के बग़ैर वर्धा नहीं जा सकता।''* *गांधी जी के नज़दीकी सुधीर घोष और उनके सचिव प्यारेलाल ने नेहरू और पटेल के बीच मतभेदों पर* *लंदन टाइम्स में छपी एक टिप्पणी* पर उनकी राय मांगी,इस पर गांधी ने कहा, कि वह यह मामला पटेल के सामने उठाएंगे, जो चार बजे उनसे मिलने आ रहे हैं, और फिर वह नेहरू से भी बात करेंगे जिनसे शाम सात बजे उनकी मुलाक़ात तय थी। उधर, बिरला हाउस के लिए निकलने से पहले नाथूराम गोडसे ने कहा, कि उनका मूंगफली खाने को जी चाह रहा है। आप्टे उनके लिए मूंगफली ढूंढने निकले लेकिन थोड़ी देर बाद आकर बोले- ''पूरी दिल्ली में कहीं भी मूंगफली नहीं मिल रही, क्या काजू या बादाम से काम चलेगा?'' *गोडसे को स
26 जनवरी गणतंत्र दिवस
2021/01/26
India Republic Day: जानिए गणतंत्र दिवस का इतिहास, महत्‍व और रोचक तथ्‍य Republic Day 2020: डॉ. भीमराव अंबेडकर (B. R. Ambedkar) ने संविधान को दो साल, 11 महीने और 18 दिनों में तैयार कर राष्ट्र को समर्पित किया था. आपको बता दें, हमारा संविधान विश्‍व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है. January 26, 2020 : भारतीय संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अपनाया था. Republic Day 2020: भारत में हर साल 26 जनवरी (26 January) को गणतंत्र दिवस (Republic Day) मनाया जाता है.. इस साल देश 71वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. दरअसल, 26 जनवरी 1950 को हमारे देश में संविधान लागू हुआ, जिसके उपलक्ष्य में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है. एक स्वतंत्र गणराज्य बनने के लिए भारतीय संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया गया था, लेकिन इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था. डॉ. भीमराव अंबेडकर (B. R. Ambedkar) ने संविधान को दो साल, 11 महीने और 18 दिनों में तैयार कर राष्ट्र को समर्पित किया था. आपको बता दें कि हमारा संविधान विश्‍व का सबसे बड़ा संविधान माना जाता है. इसे बनाने वाली संविधान सभा के अध्यक्ष भीमराव अंबेडकर थे, जबकि जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे. गणतंत्र दिवस का इतिहास गणतंत्र दिवस का इतिहास (Republic Day History) बड़ा ही रोचक है. एक स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 (26 January) को इसे एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया. साल 1929 की दिसंबर में लाहौर में पंडित जावरहलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस का अधिवेशन किया गया था. इस अधिवेशन में प्रस्ताव पारित करते हुए इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार द्वारा 26 जनवरी 1930 तक भारत को डोमीनियन का दर्जा नहीं दिया
भगवान राम की रसोई
2020/12/30
🌹♻️🎪🍛🎪♻️🌹 *🌸 जब भगवान राम ने भक्त के लिए बनाई रसोई 🌸💐👏🏻* 🌹♻️🎪🍛🎪♻️🌹 बहुत साल पहले की बात है। एक आलसी लेकिन भोलाभाला युवक था आनंद। दिन भर कोई काम नहीं करता बस खाता ही रहता और सोए रहता। घर वालों ने कहा चलो जाओ निकलो घर से, कोई काम धाम करते नहीं हो बस पड़े रहते हो। वह घर से निकल कर यूं ही भटकते हुए एक आश्रम पहुंचा। वहां उसने देखा कि एक गुरुजी हैं उनके शिष्य कोई काम नहीं करते बस मंदिर की पूजा करते हैं। उसने मन में सोचा यह बढिया है कोई काम धाम नहीं बस पूजा ही तो करना है। गुरुजी के पास जाकर पूछा, क्या मैं यहां रह सकता हूं, गुरुजी बोले हां, हां क्यों नहीं? 🌹♻️🎪🍛🎪♻️🌹 लेकिन मैं कोई काम नहीं कर सकता हूं गुरुजी : कोई काम नहीं करना है बस पूजा करना होगी आनंद : ठीक है वह तो मैं कर लूंगा ... 🌹♻️🎪🍛🎪♻️🌹 अब आनंद महाराज आश्रम में रहने लगे। ना कोई काम ना कोई धाम बस सारा दिन खाते रहो और प्रभु मक्ति में भजन गाते रहो। 🌹♻️🎪🍛🎪♻️🌹 महीना भर हो गया फिर एक दिन आई एकादशी। उसने रसोई में जाकर देखा खाने की कोई तैयारी नहीं। उसने गुरुजी से पूछा आज खाना नहीं बनेगा क्या❓ 🌹♻️🎪🍛🎪♻️🌹 गुरुजी ने कहा नहीं आज तो एकादशी है तुम्हारा भी उपवास है । 🌹♻️🎪🍛🎪♻️🌹 उसने कहा नहीं अगर हमने उपवास कर लिया तो कल का दिन ही नहीं देख पाएंगे हम तो .... हम नहीं कर सकते उपवास... हमें तो भूख लगती है आपने पहले क्यों नहीं बताया❓ 🌹♻️🎪🍛🎪♻️🌹 गुरुजी ने कहा ठीक है तुम ना करो उपवास, पर खाना भी तुम्हारे लिए कोई और नहीं बनाएगा तुम खुद बना लो। 🌹♻️🎪🍛🎪♻️🌹 मरता क्या न करता 🌹♻️🎪🍛🎪♻️🌹 गया रसोई में, गुरुजी फिर आए ''देखो अगर तुम खाना बना लो तो राम जी को भोग जरूर लगा लेना और नदी के उस पार जाकर बना लो रसोई। 🌹♻️🎪🍛🎪♻️🌹 ठीक है, लकड़ी, आटा, तेल, घी, सब्जी लेकर आंनद
महात्मा की सीख
2020/12/30
किसी नगर में एक बूढ़ा चोर रहता था। सोलह वर्षीय उसका एक लड़का भी था। चोर जब ज्यादा बूढ़ा हो गया तो अपने बेटे को चोरी की विद्या सिखाने लगा। कुछ ही दिनों में वह लड़का चोरी विद्या में प्रवीण हो गया। दोनों बाप बेटा आराम से जीवन व्यतीत करने लगे। एक दिन चोर ने अपने बेटे से कहा, ”देखो बेटा, साधु-संतों की बात कभी नहीं सुननी चाहिए। अगर कहीं कोई महात्मा उपदेश देता हो तो अपने कानों में उंगली डालकर वहां से भाग जाना, समझे। “हां बापू, समझ गया।” एक दिन लड़के ने सोचा, क्यों न आज राजा के घर पर ही हाथ साफ कर दूं। ऐसा सोचकर उधर ही चल पड़ा। थोड़ी दूर जाने के बाद उसने देखा कि रास्ते में बगल में कुछ लोग एकत्र होकर खड़े हैं। उसने एक आते हुए व्यक्ति से पूछा, “उस स्थान पर इतने लोग क्यों एकत्र हुए हैं?” उस आदमी ने उत्तर दिया, ”वहां एक महात्मा उपदेश दे रहे हैं।“ यह सुनकर उसका माथा ठनका। ‘इसका उपदेश नहीं सुनूंगा।’ ऐसा सोचकर अपने कानों में उंगली डालकर वह वहां से भाग निकला। जैसे ही वह भीड़ के निकट पहुंचा एक पत्थर से ठोकर लगी और वह गिर गया। उस समय महात्मा जी कह रहे थे, ”कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। जिसका नमक खाएं उसका कभी बुरा नहीं सोचना चाहिए। ऐसा करने वाले को भगवान सदा सुखी बनाए रखते हैं।“ ये दो बातें उसके कान में पड़ीं। वह झटपट उठा और कान बंद कर राजा के महल की ओर चल दिया। वहां पहुंचकर जैसे ही अंदर जाना चाहा कि उसे वहां बैठे पहरेदार ने टोका, ”अरे कहां जाते हो? तुम कौन हो?“ उसे महात्मा का उपदेश याद आया, ‘झूठ नहीं बोलना चाहिए।’ चोर ने सोचा, आज सच ही बोल कर देखें। उसने उत्तर दिया, ”मैं चोर हूं, चोरी करने जा रहा हूं।“ ”अच्छा जाओ।“ उसने सोचा राजमहल का नौकर होगा। मजाक कर रहा है। चोर सच बोलकर राजमहल में प्रवेश कर गया। एक कमरे में घुसा। वहां ढेर सारा पैसा तथा जेवर देख उसका मन खुशी से भर गया

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