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Kalam Bolti Hai

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Categories
Country
India
This podcast has
31 episodes
Language
Hindi
Publisher
Paramjit kaur
Explicit
Yes
Date created
2020/10/13
Latest episode
2021/08/02
Average duration
12 min.
Release period
21 days

Description

Hamare aaspaas bahut si kahaniyaan hain . Kahi mulyon se jodti to kahi bikhrav se jhanjhorti hain ye kahaniyan... Jo Dil Ko chho jaye....vahi hai meri Kalam ka prayas ...

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दोस्ती.. एक अहसास! written and narrated by Paramjit kaur
2021/08/02
इस भागती -दौड़ती ज़िंदगी में बहुमूल्य है दोस्ती, जो अकेले में भी चेहरे पर मुस्कान ले आए, वही तो है दोस्ती...!
ईदगाह -मुंशी प्रेमचंद
2021/07/22
अमर कथाकार मुंशी प्रेमचंद जी ने इस कहानी में एक बच्चे की भावनाओं को जिस प्रकार पेश किया है.. वह बेमिसाल है। हर बार यह कहानी नई अनुभूति देती है।
एक सफ़र -मजरूह सुल्तानपुरी के साथ Poets & Poetries with Paramjit kaur
2021/07/02
रुक जाना नहीं ..तू कहीं हार के कांटों पे चल के.. मिलेंगे साये बहार के कलम की स्याही से गीत, गज़ल और शेर-ओ-शायरी की दुनिया में राज करने वाले .. मजरूह सुल्तानपुरी जिनके गीत आज भी फिज़ा में बिखरते हैं, गाए-गुनगुनाए जाते हैं।
मैं ही कश्ती हूं, मुझी में है समुंदर मेरा! निदा फ़ाज़ली
2021/06/22
Poet & Poetries with Paramjit kaur
कविता-तुम मुझको कब तक रोकोगे..!
2021/06/17
राजेश तेलंग जी द्वारा रचित यह कविता जीवन में हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
संतुलन
2021/06/11
जो तबाही हमें रुलाती है, उसकी आहट पर प्रकृति उदास हो जाती है। बाढ़, सूखा, तूफ़ान देख कर भी क्यों हम समझ नहीं पाते..? वर्ष भर उसका दोहन कर, पर्यावरण के नाम पर एक दिवस मना अपना अधिकार जताते हैं। ज़रूरी है विकास के साथ पर्यावरण में संतुलन बनाना।
पुरूषत्व की परिभाषा..!
2021/05/16
अपने अंदर अनगिनत रंगों को समेटकर भी, क्यों आज भी वह सिमट जाती है...? परमजीत कौर
कविता -ज़िंदगी हार नहीं मानती..! परमजीत कौर
2021/04/28
जीवन में परिस्थितियाँ कैसी भी हों, ज़रूरी है अपना संयम न खोना! जीवन में हारता वही है, जो सामना नहीं करता।
मिट्टी की पहचान (कविता) -परमजीत कौर
2021/01/01
इस कविता में सड़कों पर खड़े किसान का दर्द बयां करने का प्रयास किया है।
वीर (कविता)- रामधारी सिंह दिनकर। वाचन- परमजीत कौर
2020/12/27
जीवन के संघर्ष ही हमें , हमारी स्थिति का अहसास कराते हैं । कायरता और बहादुरी दोनों हमारे अंदर ही हैं । यह हम पर निर्भर है कि हम किसे चुनते हैं। राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर जी द्वारा लिखी , कविता 'वीर 'सभी वीरों को समर्पित है ।
दूरी (लघु कथा)- परमजीत कौर(लेखन व वाचन)
2020/12/26
यह जीवन रंगमंच है । हम देखते है , अपने किरदार के साथ ,ऐसे बहुत से पात्र, जो ,इस रंगमंच का अभिन्न हिस्सा होने के बावजूद सीमाओं में बंधे हैं या बांध दिये गए हैं । समाज को परिभाषित करती , यह हकीकत है , ये दूरियाँ , ये फ़ासले , कुछ लुटाते हैं , खुशियाँ मनाने में , वे लुटते हैं , पेट की भूख मिटाने में ! ©परमजीत कौर
सत्य विचलित नहीं होता (कविता)- परमजीत कौर
2020/12/20
अक्सर ,जो दिखता है, वह पूरा सत्य नहीं होता, क्योंकि ,सत्य विचलित नहीं होता ! ऐसा ही होता आया है, यह सोच कर , गलत होते देख कर भी ,मुँह मोड़ लेना ! कितना सही है ? बहाव में बह जाना और प्रश्न करने से कतराना -2 बिना सोचे समझे किसी के साँचे में ढल जाना !-2 आज ज़रूरत है , अपने आप से सवाल करने की ।

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