1539706132
Tjurbe

Advertise on podcast: Tjurbe

Categories
Country
India
This podcast has
31 episodes
Language
Hindi
Publisher
84 VIKASH
Explicit
Yes
Date created
2020/11/10
Latest episode
2025/11/30
Average duration
5 min.
Release period
76 days

Description

कोई कविता या कहानी नहीं ये अनुभव है !

Unlock Tjurbe podcast Email contact info,
Listeners & Audience details

Email contact information

Direct podcast contact details

Listeners

Audience numbers & engagement insights

Audience details

Podcast Insights

Podcast episodes

Check latest episodes from Tjurbe podcast


The Last Letter
2025/11/30
December 01,2025
Only for you
2025/09/27
only for you
In One Breath, A Lifetime.
2025/06/20
इन दिनों सब कुछ मानो थम गया है — समय, उम्र, इच्छाएँ और विचार। इस आत्ममंथन से भरे एपिसोड में एक व्यक्ति अपने भीतर की यात्रा को साझा करता है — वह यात्रा जहाँ स्मृतियाँ धुंधली हैं, पर अनुभूतियाँ तीव्र हैं। प्रकृति और चेतना के अद्वितीय संगम में, एक शांति है, एक मौन है जो भीतर के सोए हिस्सों को जगा देता है। गंगा की लहरों, चाँद की चुप्पी और साथ बैठे अजनबियों के भीतर डूबी कहानियों के बीच, यह कहानी जीवन की उसी सूक्ष्म पूर्णता को पकड़ती है, जो कहती है — "शायद तुम भी उसी ठहरते समय में साँस ले रहे हो…" एक ऐसा एपिसोड जो आत्मा को छूता है, और आपको अपनी ही अनकही यात्रा से जोड़ देता है।
अधूरी बातें और बनारस की गलियाँ
2025/06/19
यह रचना एक लेखक की आत्मा से उपजे संवादों की श्रृंखला है, जहां बचपन की महक, प्रेम की अधूरी प्रतीक्षा, और बनारस की गलियाँ जीवन का तिलिस्म बन जाती हैं। जब शब्द जलते हैं और पन्ना शांत रहना चाहता है, तब आत्मा के भीतर गूंजती है — मौन कविता। यह यात्रा, स्मृतियों और प्रश्नों की नहीं, बल्कि एक चंद्रमा की खोज की है — जो हर रात टूट कर भी लौट आता है।
बचे रह गए कुछ शब्द — फिर भी मौन ही अंतिम सत्य रहा
2025/06/19
रचना के अंत में लेखक ने बहुत कुछ कहने के बाद भी बहुत कुछ बचा रखा है — यह अधूरा नहीं है, यह मौन का सौंदर्य है। यह अंतिम भाग जीवन की यात्रा का वह क्षण है जब आत्मा, प्रेम और स्मृति सब एक हो जाते हैं और केवल मौन बचता है। और शायद वही अंतिम शब्द होता है।
The Mystic Encounter
2025/05/08
KASHI
"छत की धूप और मुस्कान का जादू"
2024/12/18
"दिसंबर की एक सुनहरी दोपहर, छत पर बिखरी धूप, गहराई में डूबे विचार, और एक मासूम बालक का साधारण-सा प्रश्न—'क्या मैं कुछ ले जा सकता हूं?' इस प्रश्न ने मुझे जीवन के सबसे सरल और गहरे सत्य से जोड़ दिया। एक मुस्कान की ताकत, जो न केवल बांटी जा सकती है, बल्कि हर जगह उजाला भर सकती है। आइए, इस कहानी के साथ उन साधारण क्षणों की सुंदरता को महसूस करें, जो जीवन को असाधारण बना देते हैं।"
Tracing the Path of Forgotten Memories.
2023/10/07
Written by - @kahaaniya_andazz28 (Archana)
इस तरह बड़े बेटे बतियाते हैं !
2023/08/07
क्योंकि बड़े बेटों को आता कहां है सीधे सादे प्रेम के दो लफ़्ज़ बोलना ।
प्रेमिका के साथ ,वो खूबसूरत चांदनी रात !!
2023/05/16
जीवन में कुछ पल ऐसे होते हैं जिन्हें हम बार-बार जीना चाहते हैं, और यह निश्चित रूप से उनमें से एक था।
मैं अब विराम ले रहा हूं !
2023/05/10
पता नहीं कितने जख्म हैं सीने में, ये ख्वाब ,ये ख्वाइश,ये हसरतें सब खामोश है, मैं खोजता हूं खुदा कि मंजिल को … कोई कहता है ,खुदा कब्र वालों के साथ है !! Content credit - Shivam Mishra Ji
बनारस
2023/05/10
लाखा मेलों का शहर
जीते जी इलाहाबाद
2023/05/04
~ ममता कालिया
एक छोटा कमरा और ढेर सारी उम्मीदें !
2023/04/03
ज्ञान का संग्रह ,सपनों की अनगिनत दुनिया ,जवान दिल और ऊंची उम्मीदें ,ये सब है मेरे (छात्र ) जीवन में ।
उसकी आखें !
2023/01/10
कौन यकीन करता ही की आखें पढ़ी जा सकती है ?

Podcast reviews

Read Tjurbe podcast reviews


0 out of 5
0 reviews

Podcast sponsorship advertising

Start advertising on Tjurbe relevant audience podcasts


What do you want to promote?