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Lucky

Advertise on podcast: Lucky

This podcast has
37 episodes
Language
Hindi
Explicit
No
Date created
2020/11/11
Latest episode
2025/11/18
Average duration
12 min.
Release period
127 days

Description

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यहाँ चाय ठंडी नहीं होती!
2025/11/18
ये कहानी है जो वास्तविकता से बहुत परे नहीं है! कुछ भूली बिसरी यादें हैं जो कभी आपसे ही उलझ कर आपसे सवाल करने लग जाती हैं। कोई चेहरा जाना पहचाना सा लगता है। कभी आपको लगता है कि कोई रास्ता जहां आप पहली बार जा रहे होते हैं… देखा दाखा सा है…
बदलते कायनात-8
2025/08/30
Last episode of ‘Badaltay Kayanat’
The Last Prescription
2024/09/24
A letter from the pages of My Dear Reha
Prologue
2024/09/23
It is a prologue to my book, My Dear Reha which is available on Amazon https://www.amazon.in/dp/9334025921
बदलते कायनात 7
2023/01/08
Aayan wants to search his mother through Quantum Physics..
बदलते कायनात 6
2022/12/28
आयन अपनी ममी को Quantum Physics के माध्यम से ढूँढना चाहता है
बदलते कायनात 5
2022/12/17
आयन अपनी ममी के quantum physics के माघ्यम से ढूँढना चाहता है…
बदलते कायनात 4
2022/12/09
ममी की मृत्यु के बाद, आयन पहली बार स्कूल पहुँचता है। पर उसके मन और मस्तिष्क में केवल एक ही विचार है कि कैसे वो quantum physics के माध्यम से अपनी ममी के तक जा सकता है।
बदलते कायनात 3
2022/12/05
Quantum Physics के माध्यम से कायनातों में जाना… आयन को विश्वास था कि वो अपनी ममी को जरूर खोज कर रहेगा…
बदलते कायनात 1
2022/12/02
एक बच्चे की कहानी जो Quantum Physics के माध्यम से अपनी स्वर्गीय ममी को ढूँढने निकल पड़ा है…
बदलते कायनात 2
2022/12/02
आयन अपने ममी पापा के साथ Switzerland आ चुका है
Gift
2022/01/28
On the marriage anniversary of Reha n Nitish on 28/1/22 I wanted to give her a surprise.. then what happened ..
आज़ादी की क़ीमत
2021/01/26
गणतंत्र दिवस के उपलक्ष पर, आपके समक्ष प्रस्तुत है एक देशभक्ति पर आधारित मेरे द्वारा लिखा गया एक नाटक।
बीच हमारे का रिश्ता 8
2021/01/14
बीते बचपन की वो यादें जो मेरे दिल के बहुत क़रीब हैं... जिनका कोई मतलब नहीं है पर जो बिना मतलब के मेरे आगे पीछे घूमती रहती हैं... जिनके होने से मैं हूँ ... आईये चलें एक बार फिर गंगा नदी की नहर के तट पर बसे रुड़की शहर की ओर, जैसा वो था 1968 में और मुझसे वहीं मिलें जब मैं आठवीं में था
बीच हमारे का रिश्ता 7
2021/01/08
1967, 1968, 1969... मेरे बचपन और जवानी के बीच में झूलते यह तीन साल .....मेरे दिल के बहुत क़रीब हैं ....न रूड़की अब वैसा रहा है और न ही मैं अब वैसा हूँ ... समय अपना काम दोनों पर ही कर गया है ....पर यादें आज भी ताज़ा हैं मानो कल की बात हो...

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