1589603024
Kavita Path

Advertise on podcast: Kavita Path

This podcast has
45 episodes
Language
Hindi
Publisher
aks
Explicit
No
Date created
2021/10/09
Latest episode
2026/01/05
Average duration
3 min.
Release period
82 days

Description

Poems from well known Hindi poets recited for your listening pleasure.

Unlock Kavita Path podcast Email contact info,
Listeners & Audience details

Email contact information

Direct podcast contact details

Listeners

Audience numbers & engagement insights

Audience details

Podcast Insights

Podcast episodes

Check latest episodes from Kavita Path podcast


Zaroori Hai - Aks
2026/01/05
Listen in to a recitation of the poem "Zaroori Hai" written by Aks.
Nazare Chute Jaate Hain - Aks
2025/11/15
Listen in to a recitation of the poem "Nazare Chute Jaate Hain" written by Aks.
Main Aur Mera Main - Aks
2025/11/08
Listen in to a recitation of the poem "Main Aur Mera Main" written by Aks.
Shaadi-shuda Kavi ki Diary - Aks
2025/11/01
Listen in to a recitation of the poem "Shaadi-shuda Kavi ki Diary" written by Aks.
Dil Ki Shyahi - Aks
2025/10/25
Listen in to a recitation of the poem "Dil Ki Shyahi" written by Aks.
Phir Bhi The Hum - Aks
2025/10/18
Listen in to a recitation of the poem "Phir Bhi The Hum" written by Aks.
Sunai De - Aks
2025/10/12
Listen in to a recitation of the poem "Sunai De" written by Aks.
Lafson Ki Wapasi - Aks
2025/05/18
Listen in to a recitation of the poem "Lafson Ki Wapasi" written by Aks. Lyrics in Hindi: सिंगापुर में हूँ आजकल, ये तो है सही, दिल्ली वाला हूँ मगर, ये मत भूलिएगा कभी। ज़िंदगी की दौड़ में सब कुछ पा लिया है सही, पर जो खो गया था बचपन में, वो मिल न सका कभी। कलम को भूल बैठे थे, कुछ साल पहले सही, अब लफ़्ज़ फिर से आने लगे हैं, जैसे लौटे कोई कभी। किसी मिसरे में छुपा हूँ, किसी नज़र में सही, मैं अब किताबों की तरह खुलता हूँ धीरे-धीरे कभी। भीड़ में भी अक्सर ख़ुद से दूर रहा हूँ सही, शेरों ने ही पास बुलाया, जब कोई न था कभी। हर शेर में दिखा कोई अक्स-सा चेहरा सही, लोग समझे शायरी है, मैं समझा ज़िंदगी कभी।
Jo Sindoor Tha Ab Sitara Bana - Aks
2025/05/14
Listen in to a recitation of the poem "Jo Sindoor Tha Ab Sitara Bana" written by Aks. Lyrics in Hindi: जो सिंदूर था, अब सितारा बना,जो बिखरा था कल, वो सहारा बना। वो माँ की दुआ थी कि बेटे का फ़र्ज़,जो चुप था कभी, अब इशारा बना। जो कांपते लफ़्ज़ों में छुपती थी आग,वही जख़्म अब इक शरारा बना। जिसे ख़त में बस "मैं ठीक हूँ" लिखा,वो जुमला ही जैसे दोबारा बना। कभी जूते, कभी रेत में मिले नाम,हर गुमशुदा अब नज़ारा बना। वो बच्चा जो सीमा पे लहरा गया,उसी का जुनूँ अब किनारा बना। "अक्स" ने जो ख़ामोशी में कह दिया,वो लफ़्ज़ हर दिल का नारा बना।
Zindagi Aur Maut Ka Fasana - Aks
2025/03/27
Listen in to a recitation of the poem "Zindagi Aur Maut Ka Fasana" written by Aks. Lyrics in Hindi: हयात क्या है, हर सांस में मौत का साया हैसपने अधूरे क्यों, ये राज़ समझ न आया है रोज़ जीते हैं मगर ज़िंदगी क्या हासिल हैसिर्फ़ मौत ने ही हकीकत का आईना दिखाया है ज़िंदगी रंगों की महफ़िल है, पर फीके रंग सभीबस मौत के रंग ने सच्चा रंग दिखाया है उम्मीद जन्म लेती है तो सांसें लेती हैंपर मौत ने उम्मीदों को हरदम मिटाया है क्या यही जीवन है, दर्द-ओ-ग़म की दास्तांगर मौत राहत है तो क्यों जीना सिखाया है कर्म के बंधन में कब तक गुनाह का बोझ उठाधर्म के बिना क्या मौत ने चैन दिलाया है जुस्तजू में उम्र गुज़री, मंज़िल मिली नहींआखिर सफ़र का अंत मौत ने दिखाया है पछतावे से भरी जब मौत की गहराई में उतरेपूछा उसी ने, क्या खुद को अब तक भुलाया है ज़िंदगी की जंग में चैन आखिरी रस्म मेंमौत के बाद क्या जंग को नया मोड़ आया है उम्र भर रहे जुदा, दिलों में थी दूरियांआख़िर मौत ने ही सबको मिलाया है मेरी बेजान आंखों को देख कर बताओ येक्या जीवन का एहसास कहीं लौट आया है रूह जब घर छोड़ के चल पड़ी सफ़र परक्या अकेला है सफ़र, या कोई संग आया है ज़िंदगी बांटती रही रिश्तों को हमेशासिर्फ़ मौत ने ही सबको फिर एक बनाया है ए मौत ज़रा ठहर, अभी थोड़ी मोहलत देतुझसे बचें कब तक, ये सवाल भी आया है ज़िंदगी-मौत की सच्चाई का बस इतना फसाना हैजो आज तक आया, उसे वापस भी जाना है
Humko Bihari Mat Kehna
2024/05/25
Listen in to a recitation of the poem “Humko Bihari Mat Kehna” by Sahil Kumar. Follow him on YouTube - https://www.youtube.com/@sahilkumarpoet
Ayodhaya Dharm Aur Sanskriti Ki Gatha - Aks
2023/12/27
Listen in to a recitation of the poem "Ayodhaya Dharm Aur Sanskriti Ki Gatha" written by Aks. Lyrics in Hindi: सुना नहीं शायद तुमने फैसला न्यायालय का,राम लला हैं विराजमान, देव भूमि है जन्मस्थान। अयोध्या की इस पावन धरा पर,इतिहास के पन्नों में मिलता संस्कृति का सार। जहां राम की पदचाप से, मिटते सभी अंधकार,वहीं उजाला फैला हर घर, हर द्वार। न्याय की इस जीत ने जोड़ा हर दिल,अयोध्या अब बन गयी है आस्था का गिल। धरा पर जहाँ धर्म और आदर्श की ज्योत जली,वहां राम की महिमा से बदली हर गली। सदियों से जो गूँज रहा था हर हृदय में,अब लय मिली, अनुराग मिला, इस अद्भुत छवि में। राम के चरणों में जहाँ बसती है संस्कृति,उस अयोध्या में है हर रंग, हर ऋतु की सुगंधित वृत्ति। समय की धारा में भी, यहाँ अटल है आस्था,जहां एकता और प्रेम का, बहता निर्मल वास्ता। अयोध्या की इस धरा पर, जहाँ हर दिन है दिवाली,राम राज्य की इस भूमि पर, जहाँ प्रेम है अति विशाली। इस पावन भूमि की महिमा, अनंत काल तक गूँजे,जहां हर भाव, हर कर्म, राम के नाम को दूँजे। वहां प्रकृति भी गाती है, रामायण के गीत सुनहरे,अयोध्या की इस पावन भूमि पर, जहाँ सदा सत्य के दीप जले। अयोध्या, जहां धर्म और इतिहास का, मिलता है संगम,जहां हर रंग है राम का, जहां हर ध्वनि में है राम का दम। यह अयोध्या की गाथा, जो हृदय में बस जाती है, जीवन के हर पथ पर, जो सत्य और धर्म की राह दिखाती है। इस गाथा में समाया सभी का प्यार, यहाँ की मिट्टी में है संस्कार, सद्भावना और प्रेम का संचार, यही अयोध्या का है आधार।
Kab Tak Geet Sunau Radha - Kumar Vishwas
2023/11/06
Listen in to a recitation of the poem "Kab Tak Geet Sunau Radha" written by Kumar Vishwas. Lyrics in Hindi: कब तक गीत सुनाऊं राधा कब तक गीत सुनाऊं मथुरा छूटी, छूटी द्वारिका, इंद्रप्रस्थ ठुकराऊं बंसी छूटी, गोकुल छूटा, कब तक चक्र उठाऊं पिछले जन्म जानकी तुझ बिन जैसे तैसे बीता महासमर में रीता रीता, कब तक गाउ गीता और अभी कितने जन्मों तक तुझे दूर बिताऊं.... कब तक गीत सुनाऊं राधा कब तक गीत सुनाऊं बचपन से प्रभुता का बोजा ढोते कटी जवानी हरपल षडयंत्रो में उलझी सांसे आनी जानी युगकी आंखे अमृत पीती रही मुझे तक तक कर अधर मधुर देखे सबने पर पीड़ा न पहचानी इस पीडाको यार सुदामा कबतक महल दिखाऊ' कब तक गीत सुनाऊं राधा कब तक गीत सुनाऊं दो माँ ओने लाड लड़ाया, दो चहेरोने चाहा फिरभी भरी द्वरिकामे में खुदको लगा पराया मेरा क्या अपराध के मेरा गाँव गली घर छूटा आँचलसे बिछडेको जग ने पीताम्बर पहनाया चाहे जाते जाते भी बंसी मधुर बजाऊ, कब तक गीत सुनाऊं राधा कब तक गीत सुनाऊं जग भरके अपराध सदा हीं, अपने शीश उठाये रस का माखन समने चाखा, चोर हमी कहलाये युगके दुर्योधनके जब जब अहंकार को कुचला दुनिया जीती, गांधारी के शाप हमीने खाये मुझको गले लगाओ या में ही गले लगाऊ, कब तक गीत सुनाऊं राधा कब तक गीत सुनाऊं In this poem, god Krishna is talking to his beloved Radha. He is lamenting the fact that he has to be away from her for so long, and he is asking her how long he has to keep singing songs to her before she will come back to him.
Kuch Chote Sapno Ke Badle - Kumar Vishwas
2023/11/04
Listen in to a recitation of a "Kuch Chote Sapno Ke Badle" written by Kumar Vishwas. Lyrics in Hindi: कुछ छोटे सपनो के बदले,बड़ी नींद का सौदा करने,निकल पडे हैं पांव अभागे,जाने कौन डगर ठहरेंगे !वही प्यास के अनगढ़ मोती,वही धूप की सुर्ख कहानी,वही आंख में घुटकर मरती,आंसू की खुद्दार जवानी,हर मोहरे की मूक विवशता,चौसर के खाने क्या जानेहार जीत तय करती है वे, आज कौन से घर ठहरेंगेनिकल पडे हैं पांव अभागे,जाने कौन डगर ठहरेंगे !कुछ पलकों में बंद चांदनी,कुछ होठों में कैद तराने,मंजिल के गुमनाम भरोसे,सपनो के लाचार बहाने,जिनकी जिद के आगे सूरज, मोरपंख से छाया मांगे,उन के भी दुर्दम्य इरादे, वीणा के स्वर पर ठहरेंगेनिकल पडे हैं पांव अभागे,जाने कौन डगर ठहरेंगे
Woh Aane Wali Hai Ya Aane Wala Hai
2022/11/22
Listen in to a recitation of a poem written for the occasion of baby shower “Woh Aane Wali Hai Ya Aane Wala Hai” by an unknown poet. Lyrics in Hindi: वो आने वाली है, या आने वाला है। ये जल्दी ही पता चल जाने वाला है। कोई छोटे छोटे हाथों से, हमारा संसार सजाने वाला है। बचपन जीने का एक मौका फिर से लाने वाला है। उनगली पकड़ कर किसी नए रास्ते ले जाने वाला है। बेटा तेरी हर ज़िद का मतलब पूछूंगा, तू बाप बनेगा जिस दिन, तुझसे तब पूछूंगा। दादाजी का ये कहना अब सच होने वाला है। कोई नटखट, नानी का आराम चुराने वाला है। और वो जिस ने अपना सब कुछ बंटा आधा आधा है। प्यार जिस्का बाकी सबसे, नो महिने ज्यादा है। कभी हसने कभी रुलाने, रात जगाने वाला है। अभी तो बस शुरवात है, वो खूब नचाने वाला है। प्यार उससे रोज रोज बार बार होगा, अभी बहुत कुछ बाकी है जो पहली बार होगा। उसे अपने पेरों पे चलते देखना, उसका मा कहते खुद को पिघलते देखना। धेर सारे नए नए एहसास करने वाला है, कोई कमरे की छत पर अब तारे लगाने वाला है। वो आने वाली है, या आने वाला है। ये जल्दी ही पता चल जाने वाला है। कोई छोटे छोटे हाथों से, हमारा संसार सजाने वाला है।

Podcast reviews

Read Kavita Path podcast reviews


0 out of 5
0 reviews

Podcast sponsorship advertising

Start advertising on Kavita Path relevant audience podcasts


What do you want to promote?