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Munish Bhatia

Advertise on podcast: Munish Bhatia

This podcast has
12 episodes
Language
Punjabi
Publisher
munish bhatia
Explicit
No
Date created
2021/01/18
Latest episode
2025/05/24
Average duration
3 min.
Release period
145 days

Description

Lyrics and Recitation Munish Bhatia

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मानव जन्म..the human birth
2025/05/24
वो भोर जब हवाएं कुछ कह रही थीं तभी सांसों ने पहली दस्तक दी, नभ ने खोले सम्भावनाओं के द्वार, और एक परिंदा नई उड़ानों के सपने लिए इस धरा पर उतरा। हर दिन एक प्रश्न बनकर दहलीज पर बैठा रहा क्या पाया इस जीवन में? क्या रह गया अधूरा सा? कभी चाह में कुछ पाने की, कभी खोने के डर में उलझा रहा मन। इस देह को मिली व्यस्तता झूठ, छल और भ्रमजालों से अपनों की बेरुखी में भी कुछ अपनापन ढूंढता रहा। मृत्यु को जानकर भी जन्म से जूझता रहा जीवन भर उस अनसुलझे रहस्य के साथ— “क्यूं आया हूं इस धरा पर?” भटकन बनी रही पथ की पहचान, मंजिलें बदलती रहीं चुपचाप, और जीवन कभी रेत सा फिसलता गया, कभी सीप सा कुछ संजोने की चाह में। हर मोड़ पर मंजिलें दूर होती रहीं, राहें अनजानी, और थकान केवल आत्मा को छूती रही। जो पाया, वह कम लगा, जो चाहा, वह अधूरा ही रहा, क्योंकि अंतहीन है इच्छाओं का समंदर। फिर भी, इस संसार से विदा लेने से पहले हर कोई कुछ जोड़ना चाहता है थोड़ी दौलत, थोड़ा नाम, थोड़ी पहचान इस क्षणभंगुर यात्रा में। लेकिन एक दिन हर परिंदा जान ही जाता है— सब कुछ पाने के बाद भी जो अपनों तक लौट न सके, वह सबसे ज्यादा खो बैठा। इसलिए शायद मानव जन्म का सार यही है— कि हम समझ सकें सच्चा सुख न बाहरी उड़ानों में है, ना अर्जनों की भीड़ में, बल्कि उन रिश्तों में है जो हमें सचमुच घर लौटने की राह दिखाते हैं। -मुनीष भाटिया मोहाली
तन्हाई...the loneliness
2025/03/02
अब ढलने लगा है सफर उम्र का, बैठा हूँ ख़ामोश, उदास,अकेला, सोच रहा हूँ बीते लम्हों को, क्या पाया, क्या खोया बेवजह।
Maa se Rishta
2024/08/04
Maa se Rishta
Cancer se yari..
2024/05/31
मैंने कर ली अब इस बीमारी से यारी और  बना लिया महबूब इसको, क्यूंकि है ये हकीकत कि  सितमगर से मिले ज़ख्म की  आदत सी हो जाती है !
Anni vand
2023/12/16
Anni vand
I Cancer Survivor
2023/11/18
This is Story of My life when I was diagnosed with cancer and how I fought with pain and Stress during period of Treatment.
Dharti Punjab di
2023/08/26
Land of Punjab
Tumhari Yadein
2023/07/25
Dil me utarti yadein...
Aey Zindgi
2023/07/22
ए जिन्दगी किसी इक को तो अपने दिल में बसा लेती, किन्तु खुद्दारी के झांसे में आकर, किसी एक को लोगों की भीड में अपना तक ना बना नहीं सकी तुम ! समझाया खुद को बहुत कि हार में अश्क ना बहाएं, लेकिन हर हताशा पर आंखों से आँसू रुक पाए हों, ये तुमसे हो ना सका ए जिंदगी! विश्वास ग़र दिल में घुलता है तो, एहसास प्रेम का बनता है किन्तु विश्वास किसी के दिल मे जगा रहे, ये तुमसे हो सका नहीं ए जिंदगी! हालात से भयभीत होकर नहीं, अपितु दुनिया में मुश्किलों से सीखने की होती है जरूरत, किन्तु मुश्किलों से कुछ सीख पाते ये तुमसे हो ना सका ए जिंदगी! मतलब के रिश्ते हैं सब यहाँ, उम्मीदे किसी से की नहीं जाती आज के स्वार्थी दौर में, किन्तु मतलब के रिश्ते तक भी निभा नहीं पाई ताउम्र ये जिंदगी  ! मुनीष भाटिया 5376 ऐरो सिटी  मोहाली  7027120349 
Kya Faayda
2022/01/16
Munish Bhatia Poems
Intejaar
2021/02/06
Plastic se rishte
Geet pyar de ..lyrics and composes by Munish Bhatia
2021/01/16
Geet pyar de..Lyricist and composer:Munish Bhatia

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