
Advertise on podcast: Kalam (Hindi Poetry)
This podcast has
81 episodes
Language
HindiPublisher
Dr. Sudhanshu KumarExplicit
No
Date created
2021/05/17
Latest episode
2024/01/25
Average duration
5 min.
Release period
28 days
Description
Presented podcasts will feature spoken lines of Hindi poems written and narrated by Sudhanshu Dubey. The episodes are a trial to reach out various sentiments and thoughts through the words.
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राजनीति में राम
2024/01/25
एक समय था जब भाजपा को अयोध्या के श्रीराम मन्दिर आन्दोलन के कारण साम्प्रदायिक पार्टी कहा जाता था। लेकिन उसी समय जनता ने भाजपा सरकार चुनकर यह बता दिया कि जनभावना का सम्मान करने वाली पार्टी साम्प्रदायिक नहीं हो सकती। आज राम नाम की शक्ति का ही परिणाम है कि भारत देश का शासन राम नाम का जप करने वालों के हाथ में है। विपक्षियों के किसी नेता में उन्हें साम्प्रदायिक कहने का साहस नहीं है। राम राज्य का अर्थ यह कदापि नहीं है कि दूसरे धर्म के लोगों से भेदभाव हो। हमारे राम सबके हैं, इसी भावना को महसूस करते हैं हमारी कविता "राजनीति में राम" से।
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सत्ता का खेल
2024/01/01
राजनीति का अर्थ है सत्ता के लिए संघर्ष। येन केन प्रकारेण सत्ता मिलनी चाहिए। सत्ता मिल जाने के बाद तो कुर्सी बचाने के लिए संघर्ष होता है। राज्य की नीतियों का निष्पादन तो नौकरशाह करते हैं जो सैद्धांतिक रूप में राजनीति नहीं करते। व्यावहारिक रूप में राजनीति तो हम सभी कहीं न कहीं करते ही हैं। राजनीतिज्ञों के आपसी सम्बन्धों की व्यंगात्मक प्रस्तुति है हमारी नयी कविता " सत्ता का खेल "।
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आखिरी सन्देश
2023/12/18
व्यक्ति का जीवन संघर्षों की कहानी है। इन्हीं संघर्षों में ही शारीरिक तथा मानसिक पीड़ा और आनंद सन्निहित है। शरीर की जीवन यात्रा में इन अनुभूतियों से प्राणिमात्र का चोली-दामन का साथ है। श्मशान मानव जीवन यात्रा का अन्तिम सत्य है। काया से किए हुए सारे कर्म और धर्म का बन्धन यहीं टूट जाता है। पीड़ा देने वाले आग के अंगारे यहाँ पीड़ा का अंत करते हुए प्रतीत होते हैं।
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तारिणी
2023/11/12
प्राणिमात्र का जीवन सरल और सहज है। हम मनोविकारों के प्रभाव में आकर ही इसे दुरूह और आडम्बरयुक्त बना देते हैं।वाह्य आडम्बरों के कारण ही समस्यायें आती हैं। ढोंग ही समाज में फैले समस्त कुत्सित मनोविकारों का मूल है। आइये इन्हीं विचारों पर कुठाराघात करते हैं हमारी कविता "तारिणी" से।
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प्राचीन से अर्वाचीन
2023/08/13
जिस प्रकार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या को बताया नहीं जा सकता उसी प्रकार सबसे प्राचीन और आधुनिक को हम नहीं बता सकते। प्रत्येक प्राचीन काल का अगला समय आधुनिक होता है और आज का आधुनिकीकरण कल प्राचीन हो जायेगा तथा भविष्य आज की तुलना में आधुनिक होगा। प्राचीन से अर्वाचीन के इन्हीं संदर्भों को ध्यान में रखते हुए मानव जीवन मूल्यों पर काल के प्रभाव को देखते हैं हमारी कविता " प्राचीन से अर्वाचीन " में।
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योग
2023/06/20
योग जीवन जीने की कला है।यह शरीर, चित्तवृत्तियाँ, मनोविकार और मस्तिष्क के परिशोधन का संस्थान है। भारतीय सनातन परंपरा का यह संस्थान भारतीयता का धरोहर है। विश्व को उद्देश्यपूर्ण शांति से जीवन जीने की कला योगसूत्र ने ही दी है। योग के विभिन्न आयामों पर सुनते हैं हमारी कविता " योग "।
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पर्यावरण
2023/06/05
स्वस्थ शरीर में स्वच्छ मन का निवास होता है और हमारा स्वास्थ्य हमारे पर्यावरण पर निर्भर करता है। विकास की अन्धी दौड़ में हमने अपने परिवेश का न केवल दोहन किया है अपितु इसे प्रदूषित करके अपने ही पैर पर कुठाराघात कर लिया है। प्रदूषण की विभीषिका और समस्या के समाधान पर सुनते हैं हमारी कविता " पर्यावरण "।
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व्यापारिक विद्यापीठ
2023/05/15
आधुनिक शिक्षा का नया फलसफा है कि शिक्षक पेशेवर हों और अपने पेशे के लिए कुछ भी करें। पेशेवर व्यक्ति अपने कार्य में दक्ष तो होता है इससे कोई इन्कार नहीं कर सकता लेकिन पेशा व्यापार का अनुगामी होता है, इसे भी स्वीकार करना पड़ेगा। शिक्षक होने के लिए पहली शर्त होनी चाहिए कि वह व्यापारी न हो क्योंकि पेशे में जैसे ही व्यापार हावी होता है पेशा नेपथ्य में चला जाता है और फिर व्यापार ही व्यापार रह जाता है। व्यवसाय में व्यापार होना स्वाभाविक प्रक्रिया है। हम इसे नहीं रोक सकते। लेकिन शिक्षा के व्यावसायिकता पर रोक अवश्य लगायी जानी चाहिए। आज के सन्दर्भ में शिक्षा के व्यापारीकरण पर व्यंग्य सुनते हैं हमारी कविता" व्यापारिक विद्यापीठ " से।
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रंग
2023/05/06
रंग का प्राणिमात्र के जीवन में अत्यधिक महत्व है। रंग से ही उनकी रंगत है और रंग से ही वे बेरंग हो जाते हैं। रंग शब्द को अनेक अर्थों में प्रयुक्त किया जाता है। हमारे रग रग में रंग की भूमिका को प्रकट करेगी हमारी कविता " रंग "।
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जन प्रतिनिधि
2023/04/14
हम भारत के लोग अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से देश का शासन करते हैं। हमारा प्रतिनिधि जब पार्टी प्रतिनिधि बन जाय तो हमारा क्या होगा?आज हमारे नेता जी हमारी समस्याओं को सुलझाने के बजाय पार्टी की समस्याओं को सुलझाने में उलझे रहते हैं। हमारे हित में उनका हित उन्हें क्यों नहीं समझ आता? आइए समस्याओं के इसी भँवर जाल को सुनते हैं हमारी कविता " जन प्रतिनिधि " से।
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जीवन और जीव
2023/04/02
क्या जगत में जीव का अस्तित्व जीवन से है या जीवन का जीव से अथवा दोनों की सम्भूति एक दूसरे के साहचर्य में ही निहित है? नर और नारी युगल से ही नवल सृजन होता है जिससे जीवन और जीव की निरंतरता जगत में अनन्तकाल से बनी हुई है और बनी रहेगी। पत्नी स्वयं में पूर्ण है पर पति के दिवंगत होने पर अपूर्णता का आभास करती है। मन के इसी भ्रम के साथ-साथ क्षण भंगुर संसार में जीव और जीवन की अनन्तता का दर्शन करायेगी हमारी कविता " जीवन और जीव "।
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देह के पैंतीस टुकड़े
2023/03/23
अक्सर शारीरिक संबंधों में प्रगाढ़ता को ही प्रेम समझ लिया जाता है। नवयुवक और युवतियाँ शारीरिक आकर्षण को ही प्रेम समझने की भूल कर जाते हैं जिसका वीभत्स परिणाम काया के पैंतीस टुकड़ों के रूप में आता है। हमारे संस्कार, नैतिक मूल्य वास्तव में प्रेम और आकर्षण के अन्तर को बताते हैं और हमें मानवीय मूल्यों की ओर ले जाते हैं। व्यक्ति की विचारधारा भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। व्यक्तिगत अहंनिष्ठ आकर्षण का दर्शन करायेगी हमारी कविता " देह के पैंतीस टुकड़े "।
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